Sad Poetry (page 360)

मैं हूँ इस शहर में ताख़ीर से आया हुआ शख़्स

अब्बास ताबिश

इल्तिजाएँ कर के माँगी थी मोहब्बत की कसक

अब्बास ताबिश

हिज्र को हौसला और वस्ल को फ़ुर्सत दरकार

अब्बास ताबिश

बोलता हूँ तो मिरे होंट झुलस जाते हैं

अब्बास ताबिश

उसे मैं ने नहीं देखा

अब्बास ताबिश

परों में शाम ढलती है

अब्बास ताबिश

मुझे रस्ता नहीं मिलता

अब्बास ताबिश

अधूरी नज़्म

अब्बास ताबिश

अभी उस की ज़रूरत थी

अब्बास ताबिश

यूँ तो शीराज़ा-ए-जाँ कर के बहम उठते हैं

अब्बास ताबिश

ये वाहिमे भी अजब बाम-ओ-दर बनाते हैं

अब्बास ताबिश

ये तो नहीं फ़रहाद से यारी नहीं रखते

अब्बास ताबिश

ये किस के ख़ौफ़ का गलियों में ज़हर फैल गया

अब्बास ताबिश

ये हम को कौन सी दुनिया की धुन आवारा रखती है

अब्बास ताबिश

ये हम जो हिज्र में उस का ख़याल बाँधते हैं

अब्बास ताबिश

ये हम जो हिज्र में उस का ख़याल बाँधते हैं

अब्बास ताबिश

याद कर कर के उसे वक़्त गुज़ारा जाए

अब्बास ताबिश

उस का ख़याल ख़्वाब के दर से निकल गया

अब्बास ताबिश

टूट जाने में खिलौनों की तरह होता है

अब्बास ताबिश

तेरी रूह में सन्नाटा है और मिरी आवाज़ में चुप

अब्बास ताबिश

तेरी आँखों से अपनी तरफ़ देखना भी अकारत गया

अब्बास ताबिश

तेरे लिए सब छोड़ के तेरा न रहा मैं

अब्बास ताबिश

शिकस्ता-ख़्वाब-ओ-शिकस्ता-पा हूँ मुझे दुआओं में याद रखना

अब्बास ताबिश

शे'र लिखने का फ़ाएदा क्या है

अब्बास ताबिश

शाख़ पर फूल फ़लक पर कोई तारा भी नहीं

अब्बास ताबिश

सदा-ए-ज़ात के ऊँचे हिसार में गुम है

अब्बास ताबिश

रम्ज़-गर भी गया रम्ज़-दाँ भी गया

अब्बास ताबिश

पस-ए-ग़ुबार मदद माँगते हैं पानी से

अब्बास ताबिश

पस-ए-ग़ुबार भी उड़ता ग़ुबार अपना था

अब्बास ताबिश

परिंदे पूछते हैं तुम ने क्या क़ुसूर किया

अब्बास ताबिश