Sad Poetry (page 358)
ख़याल-ए-ख़ातिर-ए-अहबाब
अब्दुल अहद साज़
इंतिज़ार बाक़ी है
अब्दुल अहद साज़
इबलाग़
अब्दुल अहद साज़
फ़साद के ब'अद
अब्दुल अहद साज़
दिल-दही
अब्दुल अहद साज़
अलविदा
अब्दुल अहद साज़
आवाज़ के मोती
अब्दुल अहद साज़
ज़िक्र हम से बे-तलब का क्या तलबगारी के दिन
अब्दुल अहद साज़
यूँ तो सौ तरह की मुश्किल सुख़नी आए हमें
अब्दुल अहद साज़
यूँ भी दिल अहबाब के हम ने गाहे गाहे रक्खे थे
अब्दुल अहद साज़
तब-ए-हस्सास मिरी ख़ार हुई जाती है
अब्दुल अहद साज़
सामेआ लज़्ज़त-ए-बयान-ज़दा
अब्दुल अहद साज़
सबक़ उम्र का या ज़माने का है
अब्दुल अहद साज़
न मक़ामात न तरतीब-ए-ज़मानी अपनी
अब्दुल अहद साज़
मिज़ाज-ए-सहल-तलब अपना रुख़्सतें माँगे
अब्दुल अहद साज़
मिरी निगाहों पे जिस ने शाम ओ सहर की रानाइयाँ लिखी हैं
अब्दुल अहद साज़
मेरी आँखों से गुज़र कर दिल ओ जाँ में आना
अब्दुल अहद साज़
मौत से आगे सोच के आना फिर जी लेना
अब्दुल अहद साज़
मरने की पुख़्ता-ख़याली में जीने की ख़ामी रहने दो
अब्दुल अहद साज़
मैं ने अपनी रूह को अपने तन से अलग कर रक्खा है
अब्दुल अहद साज़
लम्हा-ए-तख़्लीक़ बख़्शा उस ने मुझ को भीक में
अब्दुल अहद साज़
लफ़्ज़ों के सहरा में क्या मा'नी के सराब दिखाना भी
अब्दुल अहद साज़
लफ़्ज़ का दरिया उतरा दश्त-ए-मआनी फैला
अब्दुल अहद साज़
खुली जब आँख तो देखा कि दुनिया सर पे रक्खी है
अब्दुल अहद साज़
ख़ुद को क्यूँ जिस्म का ज़िंदानी करें
अब्दुल अहद साज़
खिले हैं फूल की सूरत तिरे विसाल के दिन
अब्दुल अहद साज़
ख़राब-ए-दर्द हुए ग़म-परस्तियों में रहे
अब्दुल अहद साज़
कभी नुमायाँ कभी तह-नशीं भी रहते हैं
अब्दुल अहद साज़
जो कुछ भी ये जहाँ की ज़माने की घर की है
अब्दुल अहद साज़
जीतने मारका-ए-दिल वो लगातार गया
अब्दुल अहद साज़