Sad Poetry (page 366)
सभी को अपना समझता हूँ क्या हुआ है मुझे
आशुफ़्ता चंगेज़ी
कहा था तुम से कि ये रास्ता भी ठीक नहीं
आशुफ़्ता चंगेज़ी
हमें भी आज ही करना था इंतिज़ार उस का
आशुफ़्ता चंगेज़ी
है इंतिज़ार मुझे जंग ख़त्म होने का
आशुफ़्ता चंगेज़ी
घर की हद में सहरा है
आशुफ़्ता चंगेज़ी
दरियाओं की नज़्र हुए
आशुफ़्ता चंगेज़ी
बुरा मत मान इतना हौसला अच्छा नहीं लगता
आशुफ़्ता चंगेज़ी
'आशुफ़्ता' अब उस शख़्स से क्या ख़ाक निबाहें
आशुफ़्ता चंगेज़ी
आँख खुलते ही बस्तियाँ ताराज
आशुफ़्ता चंगेज़ी
वापसी
आशुफ़्ता चंगेज़ी
तय-शुदा मौसम
आशुफ़्ता चंगेज़ी
सहीह कह रहे हो
आशुफ़्ता चंगेज़ी
क़िस्सा-गो
आशुफ़्ता चंगेज़ी
ख़ुदा की जगह ख़ाली है
आशुफ़्ता चंगेज़ी
आवारा परछाइयाँ
आशुफ़्ता चंगेज़ी
ये भी नहीं बीमार न थे
आशुफ़्ता चंगेज़ी
तुम ने लिक्खा है लिखो कैसा हूँ मैं
आशुफ़्ता चंगेज़ी
ताबीर इस की क्या है धुआँ देखता हूँ मैं
आशुफ़्ता चंगेज़ी
सदाएँ क़ैद करूँ आहटें चुरा ले जाऊँ
आशुफ़्ता चंगेज़ी
सभी को अपना समझता हूँ क्या हुआ है मुझे
आशुफ़्ता चंगेज़ी
रोने को बहुत रोए बहुत आह-ओ-फ़ुग़ाँ की
आशुफ़्ता चंगेज़ी
पनाहें ढूँढ के कितनी ही रोज़ लाता है
आशुफ़्ता चंगेज़ी
ख़बर तो दूर अमीन-ए-ख़बर नहीं आए
आशुफ़्ता चंगेज़ी
जिस से मिल बैठे लगी वो शक्ल पहचानी हुई
आशुफ़्ता चंगेज़ी
जिस की न कोई रात हो ऐसी सहर मिले
आशुफ़्ता चंगेज़ी
इतना क्यूँ शरमाते हैं
आशुफ़्ता चंगेज़ी
हवाएँ तेज़ थीं ये तो फ़क़त बहाने थे
आशुफ़्ता चंगेज़ी
हमें सफ़र की अज़िय्यत से फिर गुज़रना है
आशुफ़्ता चंगेज़ी
हमारे बारे में क्या क्या न कुछ कहा होगा
आशुफ़्ता चंगेज़ी
गुज़र गए हैं जो मौसम कभी न आएँगे
आशुफ़्ता चंगेज़ी