Sad Poetry (page 90)
मिरी सुब्ह-ए-ख़्वाब के शहर पर यही इक जवाज़ है जब्र का
ग़ुलाम हुसैन साजिद
मता-ए-दीद तो क्या जानिए किस से इबारत है
ग़ुलाम हुसैन साजिद
मसाफ़त-ए-उम्र में ज़ियाँ का हिसाब होता है जुस्तुजू से
ग़ुलाम हुसैन साजिद
लरज़ जाता है थोड़ी देर को तार-ए-नफ़स मेरा
ग़ुलाम हुसैन साजिद
लहू की आग अगर जलती रहेगी
ग़ुलाम हुसैन साजिद
किसी को ज़हर दूँगा और किसी को जाम दूँगा
ग़ुलाम हुसैन साजिद
ख़ुदा-ए-बर्तर ने आसमाँ को ज़मीन पर मेहरबाँ किया है
ग़ुलाम हुसैन साजिद
कहीं मोहब्बत के आसमाँ पर विसाल का चाँद ढल रहा है
ग़ुलाम हुसैन साजिद
जहाँ भर में मिरे दिल सा कोई घर हो नहीं सकता
ग़ुलाम हुसैन साजिद
इश्क़ की दस्तरस में कुछ भी नहीं
ग़ुलाम हुसैन साजिद
हुदूद-ए-क़र्या-ए-वहम-ओ-गुमाँ में कोई नहीं
ग़ुलाम हुसैन साजिद
हुआ रौशन दम-ए-ख़ुर्शीद से फिर रंग पानी का
ग़ुलाम हुसैन साजिद
होंटों पर है बात कड़ी ताज़ीरें भी
ग़ुलाम हुसैन साजिद
इक शम्अ' की सूरत में मंज़ूर किया जाऊँ
ग़ुलाम हुसैन साजिद
एक घर अपने लिए तय्यार करना है मुझे
ग़ुलाम हुसैन साजिद
दस्त-ए-राहत ने कभी रँज-ए-गिराँ-बारी ने
ग़ुलाम हुसैन साजिद
चराग़-ए-ख़ाना-ए-दिल को सुपुर्द-ए-बाद कर दूँ
ग़ुलाम हुसैन साजिद
चराग़ की ओट में है मेहराब पर सितारा
ग़ुलाम हुसैन साजिद
अपने अपने लहू की उदासी लिए सारी गलियों से बच्चे पलट आएँगे
ग़ुलाम हुसैन साजिद
अभी शब है मय-ए-उल्फ़त उण्डेलें
ग़ुलाम हुसैन साजिद
आज आईने में जो कुछ भी नज़र आता है
ग़ुलाम हुसैन साजिद
आइने में अक्स खिलता है गुल-ए-हैरत नहीं
ग़ुलाम हुसैन साजिद
आइना-आसा ये ख़्वाब-ए-नीलमीं रक्खूँगा मैं
ग़ुलाम हुसैन साजिद
ज़ीस्त का ख़ाली कटोरा आप ही भर जाएगा
ग़ुलाम हुसैन अयाज़
दास्तान-ए-दर्द-ए-दिल अहल-ए-वफ़ा कहने लगे
ग़ुलाम हुसैन अयाज़
दर्द उल्फ़त का न हो तो ज़िंदगी का क्या मज़ा
ग़ुलाम भीक नैरंग
फिर वही हम हैं ख़याल-ए-रुख़-ए-ज़ेबा है वही
ग़ुलाम भीक नैरंग
किस तरह वाक़िफ़ हों हाल-ए-आशिक़-ए-जाँ-बाज़ से
ग़ुलाम भीक नैरंग
कट गई बे-मुद्दआ सारी की सारी ज़िंदगी
ग़ुलाम भीक नैरंग
कभी सूरत जो मुझे आ के दिखा जाते हो
ग़ुलाम भीक नैरंग