Sad Poetry (page 91)
इक हुजूम-ए-ग़म-ओ-कुलफ़त है ख़ुदा ख़ैर करे
ग़ुलाम भीक नैरंग
पुराने जूते
ग़ुलाम अहमद फ़रीद
कब से बंजर थी नज़र ख़्वाब तो आया
ग़ुफ़रान अमजद
कोई दो-चार नहीं महव-ए-तमाशा सब हैं
ग़ुफ़रान अमजद
कोई दो चार नहीं महव-ए-तमाशा सब हैं
ग़ुफ़रान अमजद
कब से बंजर थी नज़र ख़्वाब तो आया
ग़ुफ़रान अमजद
अजब था ज़ोम कि बज़्म-ए-अज़ा सजाएँगे
ग़ुफ़रान अमजद
तिरा मय-ख़्वार ख़ुश-आग़ाज़-ओ-ख़ुश-अंजाम है साक़ी
ग़ुबार भट्टी
तसल्ली को हमारी बाग़बाँ कुछ और कहता है
ग़ुबार भट्टी
मिरे मुद्दआ-ए-उल्फ़त का पयाम बन के आई
ग़ुबार भट्टी
जल्वा-ए-हुस्न अगर ज़ीनत-ए-काशाना बने
ग़ुबार भट्टी
ज़मीं की हद अगर कोई नहीं है
गाैस मथरावी
क़ल्ब-ओ-नज़र के सिलसिले मेरी निगाह में रहे
गाैस मथरावी
बे-चेहरगी-ए-उम्र-ए-ख़जालत भी बहुत है
ग़ज़नफ़र हाशमी
जाते हैं वहाँ से गर कहीं हम
ग़ज़नफ़र अली ग़ज़नफ़र
बैठे हैं ईद को सब यार बग़ल में ले कर
ग़ज़नफ़र अली ग़ज़नफ़र
यक़ीन जानिए इस में कोई करामत है
ग़ज़नफ़र
तारीकी में नूर का मंज़र सूरज में शब देखोगे
ग़ज़नफ़र
सामान-ए-ऐश सारा हमें यूँ तू दे गया
ग़ज़नफ़र
सजा के ज़ेहन में कितने ही ख़्वाब सोए थे
ग़ज़नफ़र
ख़ला के दश्त से अब रिश्ता अपना क़त्अ करूँ
ग़ज़नफ़र
दर्द की कौन सी मंज़िल से गुज़रते होंगे
ग़ज़नफ़र
अजीब शख़्स है पहले मुझे हँसाता है
ग़ज़नफ़र
ज़मीं के साथ फ़लक के सफ़र में हम भी हैं
ग़यास मतीन
ख़्वाब आँखों की गली छोड़ के जाने निकले
ग़यास मतीन
जज़ीरे हों कि वो सहरा हों ख़्वाब होना है
ग़यास मतीन
आँख की पुतली में सूरज सर में कुछ सौदा उगा
ग़यास मतीन
तुझे मैं भूल जाना चाहता हूँ
ग़यास अंजुम
साज़-ए-हयात क़ैद-ओ-सलासिल कहें किसे
ग़यास अंजुम
पहुँच कर शब की सरहद पर उजाला डूब जाता है
ग़यास अंजुम