Sad Poetry (page 92)

ख़सारे में रहे लेकिन न छोड़ी सादगी हम ने

ग़यास अंजुम

हम ने जब चाहा कोई आग बुझाने आए

ग़यास अंजुम

हुजूम-ए-दर्द मिला इम्तिहान ऐसा था

ग़यास अंजुम

दर्द के चाँद की तस्वीर ग़ज़ल में आए

ग़यास अंजुम

छुपा है कर्ब-ए-मुसलसल हवा के लहजे में

ग़यास अंजुम

बे-नियाज़-ए-बहार सा क्यूँ है

ग़यास अंजुम

मुंतज़िर

ग़ौसिया ख़ान सबीन

क़दम क़दम पे है रक़्साँ उदासियों का झुण्ड

ग़ौसिया ख़ान सबीन

मुख़्तसर सी बात को भी मसअला कहते रहे

ग़ौसिया ख़ान सबीन

इक सर्द-जंग का है असर मेरे ख़ून में

ग़ौसिया ख़ान सबीन

अभी देखी कहाँ हैं आप ने सब ख़ूबियाँ मेरी

ग़ौसिया ख़ान सबीन

आँखों में हया रख के भी बेबाक बहुत थे

ग़ौसिया ख़ान सबीन

आँधी में भी चराग़ मगन है सबा के साथ

ग़ौसिया ख़ान सबीन

भीगी भीगी बरखा रुत के मंज़र गीले याद करो

ग़ौस सीवानी

न होते शाद आईन-ए-गुलिस्ताँ देखने वाले

ग़ौस मोहम्मद ग़ौसी

तीर जैसे कमान से निकला

ग़नी एजाज़

थकन ग़ालिब है दम टूटे हुए हैं

ग़नी एजाज़

कोई हमराह नहीं राह की मुश्किल के सिवा

ग़नी एजाज़

जुनूँ में देर से ख़ुद को पुकारता हूँ मैं

ग़नी एजाज़

बिजली की ज़द में एक मिरा आशियाँ नहीं

ग़नी एजाज़

बेवफ़ा के वा'दे पर ए'तिबार करते हैं

ग़नी एजाज़

बज़्म-ए-आलम में सदा हम भी नहीं तुम भी नहीं

ग़नी एजाज़

अंदाज़-ए-फ़िक्र अहल-ए-जहाँ का जुदा रहा

ग़नी एजाज़

आप अपने को मो'तबर कर लें

ग़नी एजाज़

मेरी ये आरज़ू है वक़्त-ए-मर्ग

ग़मगीन देहलवी

उस की सूरत का तसव्वुर दिल में जब लाते हैं हम

ग़मगीन देहलवी

न पूछ हिज्र में जो हाल अब हमारा है

ग़मगीन देहलवी

मुखड़ा वो बुत जिधर करेगा

ग़मगीन देहलवी

जो न वहम-ओ-गुमान में आवे

ग़मगीन देहलवी

अल्फ़ाज़-ए-बे-सदा का इम्कान आइने में

ग़ालिब इरफ़ान