Sad Poetry (page 89)
कहिए क्या और फ़ैसले की बात
ग़ुलाम मौला क़लक़
जो दिलबर की मोहब्बत दिल से बदले
ग़ुलाम मौला क़लक़
जौहर-ए-आसमाँ से क्या न हुआ
ग़ुलाम मौला क़लक़
हम तो याँ मरते हैं वाँ उस को ख़बर कुछ भी नहीं
ग़ुलाम मौला क़लक़
हो जुदा ऐ चारा-गर है मुझ को आज़ार-ए-फ़िराक़
ग़ुलाम मौला क़लक़
हर अदावत की इब्तिदा है इश्क़
ग़ुलाम मौला क़लक़
है ख़मोशी-ए-इंतिज़ार बला
ग़ुलाम मौला क़लक़
ग़ैर शायान-ए-रस्म-ओ-राह नहीं
ग़ुलाम मौला क़लक़
दूरी में क्यूँ कि हो न तमन्ना हुज़ूर की
ग़ुलाम मौला क़लक़
दोस्ती उस की दुश्मनी ही सही
ग़ुलाम मौला क़लक़
दीदा-ए-सर्फ़-ए-इंतिज़ार है शम्अ
ग़ुलाम मौला क़लक़
चल दिए हम ऐ ग़म-ए-आलम विदाअ'
ग़ुलाम मौला क़लक़
बे-गाना-अदाई है सितम जौर-ओ-सितम में
ग़ुलाम मौला क़लक़
ऐ सितम-आज़मा जफ़ा कब तक
ग़ुलाम मौला क़लक़
ऐ ख़ार ख़ार-ए-हसरत क्या क्या फ़िगार हैं हम
ग़ुलाम मौला क़लक़
आप के महरम असरार थे अग़्यार कि हम
ग़ुलाम मौला क़लक़
ये सच है मेरी सदा ने रौशन किए हैं मेहराब पर सितारे
ग़ुलाम हुसैन साजिद
मेरी क़िस्मत है ये आवारा-ख़िरामी 'साजिद'
ग़ुलाम हुसैन साजिद
किसी की याद से दिल का अंधेरा और बढ़ता है
ग़ुलाम हुसैन साजिद
इश्क़ पर इख़्तियार है किस का
ग़ुलाम हुसैन साजिद
इश्क़ पर फ़ाएज़ हूँ औरों की तरह लेकिन मुझे
ग़ुलाम हुसैन साजिद
हम मुसाफ़िर हैं गर्द-ए-सफ़र हैं मगर ऐ शब-ए-हिज्र हम कोई बच्चे नहीं
ग़ुलाम हुसैन साजिद
ढूँड लाया हूँ ख़ुशी की छाँव जिस के वास्ते
ग़ुलाम हुसैन साजिद
अगर है इंसान का मुक़द्दर ख़ुद अपनी मिट्टी का रिज़्क़ होना
ग़ुलाम हुसैन साजिद
सिसक रही हैं थकी हवाएँ लिपट के ऊँचे सनोबरों से
ग़ुलाम हुसैन साजिद
रुका हूँ किस के वहम में मिरे गुमान में नहीं
ग़ुलाम हुसैन साजिद
नुमूद पाते हैं मंज़रों की शिकस्त से फ़तह के बहाने
ग़ुलाम हुसैन साजिद
नशात-ए-फ़त्ह से तो दामन-ए-दिल भर नहीं पाए
ग़ुलाम हुसैन साजिद
नहीं अब रोक पाएगी फ़सील-ए-शहर पानी को
ग़ुलाम हुसैन साजिद
मिरी विरासत में जो भी कुछ है वो सब इसी दहर के लिए है
ग़ुलाम हुसैन साजिद