Sharab Poetry (page 39)
मय-शिकस्ता-दिली ऐ हरीफ़-ए-ज़ौक़-ए-नुमू
असलम अंसारी
पौ फटते ही ट्रेन की सीटी जब कानों में गूँजती है
आसिमा ताहिर
कहाँ तलाश में जाऊँ कि जुस्तुजू तू है
आसिम वास्ती
तालिब हो वहाँ आन के क्या कोई सनम का
आसिफ़ुद्दौला
क़ासिद तो लिए जाता है पैग़ाम हमारा
आसिफ़ुद्दौला
चंद लम्हे विसाल-मौसम के
अासिफ़ शफ़ी
तेरे आने का गुमाँ होता है
अशरफ़ यूसुफ़
हर एक रुख़ से मुझे लुत्फ़-ए-जुस्तुजू आए
अशरफ़ रफ़ी
बस दिखा दे राह-ए-मय-ख़ाना कोई
अशोक साहनी साहिल
नफ़रतें दिल से मिटाओ तो कोई बात बने
अशोक साहनी
रघुपति राघव राजा राम
अशोक लाल
मोहतसिब ने जो निकाला हमें मयख़ाने से
अश्क रामपुरी
आ जाओ अब तो ज़ुल्फ़ परेशाँ किए हुए
अशहद बिलाल इब्न-ए-चमन
हर लम्हा चाँद चाँद निखरना पड़ा मुझे
अाशा प्रभात
ग़ुबार सा है सर-ए-शाख़-सार कहते हैं
असग़र सलीम
सराए
असग़र मेहदी होश
रिंद जो ज़र्फ़ उठा लें वही साग़र बन जाए
असग़र गोंडवी
एक ऐसी भी तजल्ली आज मय-ख़ाने में है
असग़र गोंडवी
आलम से बे-ख़बर भी हूँ आलम में भी हूँ मैं
असग़र गोंडवी
यूँ न मायूस हो ऐ शोरिश-ए-नाकाम अभी
असग़र गोंडवी
ये नंग-ए-आशिक़ी है सूद ओ हासिल देखने वाले
असग़र गोंडवी
ये क्या कहा कि ग़म-ए-इश्क़ नागवार हुआ
असग़र गोंडवी
वो नग़्मा बुलबुल-ए-रंगीं-नवा इक बार हो जाए
असग़र गोंडवी
शिकवा न चाहिए कि तक़ाज़ा न चाहिए
असग़र गोंडवी
रक़्स-ए-मस्ती देखते जोश-ए-तमन्ना देखते
असग़र गोंडवी
न ये शीशा न ये साग़र न ये पैमाना बने
असग़र गोंडवी
मौजों का अक्स है ख़त-ए-जाम-ए-शराब में
असग़र गोंडवी
मजाज़ कैसा कहाँ हक़ीक़त अभी तुझे कुछ ख़बर नहीं है
असग़र गोंडवी
मय-ए-बे-रंग का सौ रंग से रुस्वा होना
असग़र गोंडवी
कोई महमिल-नशीं क्यूँ शाद या नाशाद होता है
असग़र गोंडवी