संग-ए-बे-क़ीमत तराशा और जौहर कर दिया

संग-ए-बे-क़ीमत तराशा और जौहर कर दिया

शम-ए-इल्म-ओ-आगही से दिल मुनव्वर कर दया

फ़िक्र-ओ-फ़न तहज़ीब-ओ-हिकमत दी शुऊ'र-ओ-आगही

गुम-शुदान-ए-राह को गोया कि रहबर कर दया

चश्म-ए-फ़ैज़ और दस्त वो पारस-सिफ़त जब छू गए

मुझ को मिट्टी से उठाया और फ़लक पर कर दिया

दे जज़ा अल्लाह तू इस बाग़बान-ए-इल्म को

जिस ने ग़ुंचों को खिलाया और गुल-ए-तर कर दिया

ख़ाका-ए-तसवीर था मैं ख़ाली-अज़-रंग-ए-हयात

यूँ सजाया आप ने मुझ को कि 'क़ैसर' कर दिया

(436) Peoples Rate This

Your Thoughts and Comments

In Hindi By Famous Poet Qaisar Hayat. is written by Qaisar Hayat. Complete Poem in Hindi by Qaisar Hayat. Download free  Poem for Youth in PDF.  is a Poem on Inspiration for young students. Share  with your friends on Twitter, Whatsapp and Facebook.