Ghazal Poetry (page 106)
ज़माने में मोहब्बत की अगर बारिश नहीं होती
सय्यद आरिफ़ अली
तीर पे तीर निशानों पे निशाने बदले
सय्यद आरिफ़ अली
गले हम क्या मिलें उस आदमी से
सय्यद आरिफ़ अली
बदल के हम ने तरीक़ा ख़त-ओ-किताबत का
सय्यद आरिफ़ अली
अपने गुज़रे हुए लम्हात ज़रा याद करो
सय्यद आरिफ़ अली
आप बुलाएँ हम न आएँ ऐसी कोई बात नहीं
सय्यद आरिफ़ अली
ज़िंदा हुआ है आज तू मरने के ब'अद भी
सय्यद अारिफ़
ठीक है उजली याद का रिश्ता अपने दिल से टूटा भी
सय्यद अारिफ़
सूरज सितारे चाँद जो बर्बाद हो गए
सय्यद अारिफ़
रऊनतों में न इतनी भी इंतिहा हो जाए
सय्यद अारिफ़
नशा नशा सा हवाएँ रचाए फिरती हैं
सय्यद अारिफ़
लग़्ज़िशों से मावरा तू भी नहीं मैं भी नहीं
सय्यद अारिफ़
डरता हूँ ज़िंदगी के वसीले नहीं मिले
सय्यद अारिफ़
आता है कोई हाथ अगर हात सफ़र में
सय्यद अारिफ़
ये कैसे ख़ौफ़ हमें आज फिर सताने लगे
सय्यद अनवार अहमद
तुझ को ही सोचता रहूँ फ़ुर्सत नहीं रही
सय्यद अनवार अहमद
राहत के वास्ते न रिफ़ाक़त के वास्ते
सय्यद अनवार अहमद
मिट्टी तिरे महकने से मुझ को गुमान है
सय्यद अनवार अहमद
क्यूँ मिल रही है उन को सज़ा चीख़ती रही
सय्यद अनवार अहमद
कल पहली बार उस से इनायत सी हो गई
सय्यद अनवार अहमद
जो माल उस ने समेटा था वो भी सारा गया
सय्यद अनवार अहमद
जैसे कि इक फ़्रेम हो तस्वीर के बग़ैर
सय्यद अनवार अहमद
पहले से देखना कहीं बेहतर बनाएँगे
सय्यद अमीनुल हसन मोहानी बिस्मिल
ज़ेब उस को ये आशोब-ए-गदाई नहीं देता
सय्यद अमीन अशरफ़
ये आँख तंज़ न हो ज़ख़्म-ए-दिल हरा न लगे
सय्यद अमीन अशरफ़
वो ख़ुद को मेरे अंदर ढूँडता है
सय्यद अमीन अशरफ़
वजूद को जिगर-ए-मो'तबर बनाते हैं
सय्यद अमीन अशरफ़
तसलसुल पाएमाली का मिलेगा
सय्यद अमीन अशरफ़
सुख़न की शब लहू होती रहेगी
सय्यद अमीन अशरफ़
शौक़-ए-वारफ़्ता को मलहूज़-ए-अदब भी होगा
सय्यद अमीन अशरफ़