Ghazal Poetry (page 418)

शिकवा जो मेरा अश्क में ढलता चला गया

नय्यर सुल्तानपुरी

ख़ैर लाया तो जुनूँ दीवार से दर की तरफ़

नय्यर सुल्तानपुरी

दिल ही तो है निगाह-ए-करम से पिघल गया

नय्यर सुल्तानपुरी

यूँ ज़िंदगी की हम ने सियह रात काट दी

नय्यर क़ुरैशी गंगोही

ख़ानों में ख़ुद ही बट के अब इंसान रह गया

नय्यर क़ुरैशी गंगोही

कल उस के नेक बनने का इम्कान भी तो है

नय्यर क़ुरैशी गंगोही

उन के रुख़ पर निखार का आलम

नय्यर आस्मी

शोर-ए-महशर उठा हर सम्त से मय-ख़ाने में

नय्यर आस्मी

शोर-ए-महशर उठा हर सम्त से मयख़ाने में

नय्यर आस्मी

पास आ कर चला गया कोई

नय्यर आस्मी

न नवाज़िशों की है आरज़ू न तिरी जफ़ा का मलाल है

नय्यर आस्मी

न नवाज़िशों की है आरज़ू न तिरी जफ़ा का मलाल है

नय्यर आस्मी

कहीं रुस्वा तिरा शैदा सर-ए-महफ़िल न हो जाए

नय्यर आस्मी

कहीं रुस्वा तिरा शैदा सर-ए-महफ़िल न हो जाए

नय्यर आस्मी

इलाज कोई जहाँ का न साज़गार आया

नय्यर आस्मी

इलाज कोई जहाँ का न साज़गार आया

नय्यर आस्मी

आँखों से बरसते अश्कों की बरसात पे रोना आता है

नय्यर आस्मी

यूँ भी जब तक ग़म से मर नहीं जाता मैं

नईम गिलानी

ज़रा कीजिए ग़ौर हज़रत-सलामत

नैन सुख

यार का वस्ल-ए-शबा-शब न हुआ था सो हुआ

नैन सुख

वो यार हम से ख़फ़ा है तो हो हुआ सो हुआ

नैन सुख

वाजिबी बात कहीं ज़रा कहिए

नैन सुख

तुझ तेग़ की निगह से मिरा कट गया है दिल

नैन सुख

नसीहत से मेरी ये सौ कोस भागे

नैन सुख

नासेह न बक ज़्यादा मिरा मान ये सुख़न

नैन सुख

नागिन है ज़ुल्फ़-ए-यार न ज़िन्हार देखना

नैन सुख

जो बात मनअ' की है उसे कहिए क्यूँ

नैन सुख

जहाँ में जो कई गुल-बदन ख़ुश-नयन है

नैन सुख

जफ़ा का उस की गिला मत करो हुआ सो हुआ

नैन सुख

फ़स्ल-ए-गुल में हर घड़ी ये अब्र-ओ-बाराँ फिर कहाँ

नैन सुख