Ghazal Poetry (page 81)

बदन में रूह की तर्सील करने वाले लोग

तौक़ीर तक़ी

वो रंग-रूप मसाफ़त की धूल चाट गई

तौक़ीर रज़ा

वो जो इक इल्ज़ाम था उस पर कहीं

तौक़ीर रज़ा

शब-ए-तारीक हूँ नूर-ए-सहर होने की ख़्वाहिश है

तौक़ीर रज़ा

आ गई धूप मिरी छाँव के पीछे पीछे

तौक़ीर रज़ा

रुख़ से नक़ाब उन के जो हटती चली गई

तौक़ीर अहमद

रहूँ इस में हर दम न हो आना जाना

तौक़ीर अहमद

पलकों को तेरी शर्म से झुकता हुआ मैं देखूँ

तौक़ीर अहमद

कर के सारी हदों को पार चला

तौक़ीर अहमद

अपने घर पर बुला लिया उस ने

तौक़ीर अहमद

वो रौशनी जो शफ़क़ का लिबास छोड़ गई

तौक़ीर अब्बास

ठहरे पानी पे हाथ मारा था

तौक़ीर अब्बास

न जाने आग कैसी आइनों में सो रही थी

तौक़ीर अब्बास

एक टहनी से बर्ग टूटा है

तौक़ीर अब्बास

अपने मंज़र से जुदा था इक दिन

तौक़ीर अब्बास

थकन की तल्ख़ियों को अरमुग़ाँ अनमोल देती है

ताैफ़ीक़ साग़र

सदाक़त सादगी ओढ़े बुलंदी थाम लेती है

ताैफ़ीक़ साग़र

रेशम रेशम तितली देखूँ ख़्वाब-नगर की वादी में

ताैफ़ीक़ साग़र

पर्वाज़ का था शौक़ मुझे आसमान तक

ताैफ़ीक़ साग़र

मिरी सच्चाई हर सूरत तिरी मुट्ठी से निकलेगी

ताैफ़ीक़ साग़र

फ़क़ीरों का चलन यूँ जिस्म के अंदर महकता है

ताैफ़ीक़ साग़र

सदियों लहू से दिल की हिकायत लिखी गई

तसनीम फ़ारूक़ी

फिर तिरे हिज्र के जज़्बात ने अंगड़ाई ली

तसनीम फ़ारूक़ी

नज़र नज़र से मिला कर शराब पीते हैं

तसनीम फ़ारूक़ी

अक्स-ए-ज़ंजीर पे जाँ देने के पहलू दूँगा

तसनीम फ़ारूक़ी

तमाम उम्र-ए-रवाँ का माल हैरत है

तसनीम आबिदी

राज़ का बज़्म में चर्चा कभी होने न दिया

तसनीम आबिदी

फूल मुरझा जाएँगे काँटे लगे रह जाएँगे

तसनीम आबिदी

मिरे चारा-गर तुझे क्या ख़बर, जो अज़ाब-ए-हिज्र-ओ-विसाल है

तसनीम आबिदी

किसी ने पूछा जो उम्र-ए-रवाँ के बारे में

तसनीम आबिदी