Ghazal Poetry (page 900)

मुद्दआ'-ओ-आरज़ू शौक़-ए-तमन्ना आप हैं

अब्दुल मन्नान तरज़ी

मिरी निगाह को जल्वों का हौसला दे दो

अब्दुल मन्नान तरज़ी

मेरी आँखों में आँसू प्यारे

अब्दुल मन्नान तरज़ी

मरहला शौक़ का है लफ़्ज़-ओ-बयाँ से आगे

अब्दुल मन्नान तरज़ी

मर जाएँगे पिंदार का सौदा न करेंगे

अब्दुल मन्नान तरज़ी

मैं पहुँचा अपनी मंज़िल तक मगर आहिस्ता आहिस्ता

अब्दुल मन्नान तरज़ी

क्या यहाँ देखिए क्या वहाँ देखिए

अब्दुल मन्नान तरज़ी

ख़्वाब की बस्ती में अफ़्साने का घर

अब्दुल मन्नान तरज़ी

ख़ून जब अश्क में ढलता है ग़ज़ल होती है

अब्दुल मन्नान तरज़ी

खुली जब आँख तो देखा कि था बाज़ार का हल्क़ा

अब्दुल मन्नान तरज़ी

जब निगाह-ए-तलब मो'तबर हो गई

अब्दुल मन्नान तरज़ी

जब भी गुलशन में चली ठंडी हवा

अब्दुल मन्नान तरज़ी

हर वरक़ इक किताब हो जाए

अब्दुल मन्नान तरज़ी

हर आन नई शान है हर लम्हा नया है

अब्दुल मन्नान तरज़ी

ग़ज़ल में फ़न का जौहर जब दिखाते हैं ग़ज़ल वाले

अब्दुल मन्नान तरज़ी

दिल की पर्वाज़ है ला-मकाँ तक

अब्दुल मन्नान तरज़ी

अपने हालात का असीर हूँ मैं

अब्दुल मन्नान तरज़ी

आँख पर ए'तिबार हो जाए

अब्दुल मन्नान तरज़ी

ज़िंदगी तुझ से प्यार क्या करते

अब्दुल मन्नान समदी

नज़र की वुसअतों में कुल जहाँ था

अब्दुल मन्नान समदी

मेरे घर से उस की यादों के मकीं जाते नहीं

अब्दुल मन्नान समदी

दोस्तो ज़िंदगी अमानत है

अब्दुल मन्नान समदी

बज़्म में वो बैठता है जब भी आगे सामने

अब्दुल मन्नान समदी

बदलते मौसमों में आब-ओ-दाना भी नहीं होगा

अब्दुल मन्नान समदी

वक़्त अब सर पे वो आया है कि सर याद नहीं

अब्दुल मलिक सोज़

तू जो आबाद है ऐ दोस्त मिरे दिल के क़रीब

अब्दुल मलिक सोज़

मुन्कशिफ़ तल्ख़ी-ए-हालात न होने पाई

अब्दुल मलिक सोज़

मुझ से मेरी हयात रूठ गई

अब्दुल मलिक सोज़

कुछ हसीं यादें भी हैं दीदा-ए-नम के साथ साथ

अब्दुल मलिक सोज़

हर मसर्रत से किनारा कर लिया

अब्दुल मलिक सोज़