Ghazal Poetry (page 98)
ये फ़ना मेरी बक़ा हो जैसे
सय्यदा नफ़ीस बानो शम्अ
वो जो मिलता था कभी मुझ से बहारों की तरह
सय्यदा नफ़ीस बानो शम्अ
सुब्ह को शाम लिख दिया मैं ने
सय्यदा नफ़ीस बानो शम्अ
निगाह ओ दिल में वही कर्बला का मंज़र था
सय्यदा नफ़ीस बानो शम्अ
मुझ में आ कर ठहर गया कोई
सय्यदा नफ़ीस बानो शम्अ
मंज़िल मिले न कोई भी रस्ता दिखाई दे
सय्यदा नफ़ीस बानो शम्अ
कुछ ऐसा भी तो हो जाए कभी ऐसा करे कोई
सय्यदा नफ़ीस बानो शम्अ
कोई बतलाए माजरा क्या है
सय्यदा नफ़ीस बानो शम्अ
ख़्वाबों की हक़ीक़त भी बता क्यूँ नहीं देते
सय्यदा नफ़ीस बानो शम्अ
ख़ुद से लिपट के रो लें बहुत मुस्कुरा लिए
सय्यदा नफ़ीस बानो शम्अ
काश ऐसी भी कोई साअ'त हो
सय्यदा नफ़ीस बानो शम्अ
जिस्म ओ जाँ सुलगते हैं बारिशों का मौसम है
सय्यदा नफ़ीस बानो शम्अ
हुस्न-ए-यूसुफ़ किसे कहते हैं ज़ुलेख़ा क्या है
सय्यदा नफ़ीस बानो शम्अ
हर-सू ख़ुशबू को फ़ज़ाओं में बिखरता देखूँ
सय्यदा नफ़ीस बानो शम्अ
दर्द सीने में कहीं चीख़ रहा हो जैसे
सय्यदा नफ़ीस बानो शम्अ
ज़िंदगी है मुख़्तलिफ़ जज़्बों की हमवारी का नाम
सय्यद ज़मीर जाफ़री
यूँ क़त्ल-ए-आम नौ-ए-बशर कर दिया गया
सय्यद ज़मीर जाफ़री
यक़ीं के भी क्या क्या हिजाबात हैं
सय्यद ज़मीर जाफ़री
तूफ़ाँ नहीं गुज़रे कि बयाबाँ नहीं गुज़रे
सय्यद ज़मीर जाफ़री
तन-आसानी नहीं जाती रिया-कारी नहीं जाती
सय्यद ज़मीर जाफ़री
तजर्बात-ए-तल्ख़ ने हर-चंद समझाया मुझे
सय्यद ज़मीर जाफ़री
मुझ से मत कर यार कुछ गुफ़्तार मैं रोज़े से हूँ
सय्यद ज़मीर जाफ़री
मेरी बीवी क़ब्र में लेटी है जिस हंगाम से
सय्यद ज़मीर जाफ़री
ख़ुलासा ये मिरे हालात का है
सय्यद ज़मीर जाफ़री
जुनूँ पे जब्र-ए-ख़िरद जब भी होश्यार हुआ
सय्यद ज़मीर जाफ़री
हुस्न को ग़ायत-ए-नज़र जाना
सय्यद ज़मीर जाफ़री
हम ज़माने से फ़क़त हुस्न-ए-गुमाँ रखते हैं
सय्यद ज़मीर जाफ़री
हम न्यूट्रल हैं ख़ारजा हिकमत के बाब में
सय्यद ज़मीर जाफ़री
हम अगर दश्त-ए-जुनूँ में न ग़ज़ल-ख़्वाँ होते
सय्यद ज़मीर जाफ़री
ग़रीब-ख़ाना हमेशा से जेल-ख़ाना है
सय्यद ज़मीर जाफ़री