ख्वाब Poetry (page 104)
मकान-ए-ख़्वाब में जंगल की बास रहने लगी
अफ़ज़ाल नवेद
ख़ाली हुआ गिलास नशा सर में आ गया
अफ़ज़ाल नवेद
जंग से जंगल बना जंगल से मैं निकला नहीं
अफ़ज़ाल नवेद
एक उजली उमंग उड़ाई थी
अफ़ज़ाल नवेद
धनक में सर थे तिरी शाल के चुराए हुए
अफ़ज़ाल नवेद
बाग़ क्या क्या शजर दिखाते हैं
अफ़ज़ाल नवेद
उस पेड़ को छुआ तो समर-दार हो गया
अफ़ज़ल मिनहास
मिटते हुए नुक़ूश-ए-वफ़ा को उभारिए
अफ़ज़ल मिनहास
मैं फ़क़त इस जुर्म में दुनिया में रुस्वा हो गया
अफ़ज़ल मिनहास
काँच की ज़ंजीर टूटी तो सदा भी आएगी
अफ़ज़ल मिनहास
किसी ने ख़्वाब में आकर मुझे ये हुक्म दिया
अफ़ज़ल ख़ान
वो जो इक शख़्स वहाँ है वो यहाँ कैसे हो
अफ़ज़ल ख़ान
ये कैसे ख़्वाब की ख़्वाहिश में घर से निकला हूँ
अफ़ज़ल गौहर राव
मिरी तो आँख मिरा ख़्वाब टूटने से खुली
अफ़ज़ल गौहर राव
ज़मीं से आगे भला जाना था कहाँ मैं ने
अफ़ज़ल गौहर राव
मैं सुन रहा हूँ जो दुनिया सुना रही है मुझे
अफ़ज़ल गौहर राव
मैं ख़ुद को इस लिए मंज़र पे लाने वाला नहीं
अफ़ज़ल गौहर राव
यूँ इलाज-ए-दिल बीमार किया जाएगा
अफ़ज़ल इलाहाबादी
ये हक़ीक़त है वो कमज़ोर हुआ करती हैं
अफ़ज़ल इलाहाबादी
सुलगती रेत पे तहरीर जो कहानी है
अफ़ज़ल इलाहाबादी
ग़ज़ल का हुस्न है और गीत का शबाब है वो
अफ़ज़ल इलाहाबादी
दवा-ए-दर्द-ए-ग़म-ओ-इज़्तिराब क्या देता
अफ़ज़ल इलाहाबादी
अपनी तन्हाइयों के ग़ार में हूँ
अफ़ज़ल इलाहाबादी
कमान-ए-शाख़ से गुल किस हदफ़ को जाते हैं
अफ़ज़ाल अहमद सय्यद
वो अपने आँसू एक नाज़ुक हेयर ड्रायर से सुखाती है
अफ़ज़ाल अहमद सय्यद
मोहब्बत
अफ़ज़ाल अहमद सय्यद
हमें भूल जाना चाहिए
अफ़ज़ाल अहमद सय्यद
अगर उन्हें मालूम हो जाए
अफ़ज़ाल अहमद सय्यद
सहाब-ए-सब्ज़ न ताऊस-ए-नीलमीं लाया
अफ़ज़ाल अहमद सय्यद
कोई न हर्फ़-ए-नवेद-ओ-ख़बर कहा उस ने
अफ़ज़ाल अहमद सय्यद