ख्वाब Poetry (page 106)

यास है हसरत है ग़म है और शब-ए-दीजूर है

अफ़सर मेरठी

परेशानी है जी घबरा रहा है

अफ़सर मेरठी

मेरे लिए साहिल का नज़ारा भी बहुत है

अफ़सर माहपुरी

क्या बताएँ हाल-ए-दिल उन की शनासाई के ब'अद

अफ़सर माहपुरी

बहार आएगी गुलशन में तो दार-ओ-गीर भी होगी

अफ़सर माहपुरी

तेरी ख़ुशबू का तराशा है ये पैकर किस ने

अफ़सर आज़री

तुम्हारे हिज्र में क्यूँ ज़िंदगी न मुश्किल हो

अफ़सर इलाहाबादी

ख़याल

अफ़रोज़ आलम

बड़ा ख़ुशनुमा ये मक़ाम है नई ज़िंदगी की तलाश कर

अफ़रोज़ आलम

अत्तार के मस्कन में ये कैसी उदासी है

अफ़रोज़ आलम

मुझ को इक अर्सा-ए-दिल-गीर में रक्खा गया था

अफ़ीफ़ सिराज

हरीम-ए-दिल से निकल आँख के सराब में आ

अफ़ीफ़ सिराज

नींद भी जागती रही पूरे हुए न ख़्वाब भी

आदिल मंसूरी

वक़्त की रेत पे

आदिल मंसूरी

वक़्त की पीठ पर

आदिल मंसूरी

सितारा सो गया है

आदिल मंसूरी

सफ़ेद रात से मंसूब है लहू का ज़वाल

आदिल मंसूरी

लहू को सुर्ख़ गुलाबों में बंद रहने दो

आदिल मंसूरी

गोश्त की सड़कों पर

आदिल मंसूरी

चल निकलो

आदिल मंसूरी

बंद मुट्ठी में होंट के टुकड़े

आदिल मंसूरी

अलिफ़ लफ़्ज़ ओ मआनी से मुबर्रा

आदिल मंसूरी

आमीन

आदिल मंसूरी

वुसअत-ए-दामन-ए-सहरा देखूँ

आदिल मंसूरी

सोए हुए पलंग के साए जगा गया

आदिल मंसूरी

फिर किसी ख़्वाब के पर्दे से पुकारा जाऊँ

आदिल मंसूरी

पहलू के आर-पार गुज़रता हुआ सा हो

आदिल मंसूरी

न कोई रोक सका ख़्वाब के सफ़ीरों को

आदिल मंसूरी

कौन था वो ख़्वाब के मल्बूस में लिपटा हुआ

आदिल मंसूरी

इबलाग़ के बदन में तजस्सुस का सिलसिला

आदिल मंसूरी