ख्वाब Poetry (page 105)
गिरा तो गिर के सर-ए-ख़ाक-ए-इब्तिज़ाल आया
अफ़ज़ाल अहमद सय्यद
इक शाम ये सफ़्फ़ाक ओ बद-अंदेश जला दे
अफ़ज़ाल अहमद सय्यद
दुआ की राख पे मरमर का इत्र-दाँ उस का
अफ़ज़ाल अहमद सय्यद
बहुत न हौसला-ए-इज़्ज़-ओ-जाह मुझ से हुआ
अफ़ज़ाल अहमद सय्यद
मैं ख़ाक में मिले हुए गुलाब देखता रहा
अफ़ज़ाल फ़िरदौस
कर भी लूँ अगर ख़्वाब की ताबीर कोई और
अफ़ज़ाल फ़िरदौस
जब अपनों से दूर पराए देस में रहना पड़ता है
अफ़ज़ाल फ़िरदौस
हिजरत
आफ़ताब शम्सी
धूप
आफ़ताब शम्सी
तलाश-ए-क़ाफ़िया में उम्र सब गुज़ारी है
आफ़ताब शम्सी
सभी बिछड़ गए मुझ से गुज़रते पल की तरह
आफ़ताब शम्सी
जू-ए-रवाँ हूँ ठहरा समुंदर नहीं हूँ मैं
आफ़ताब शम्सी
जो दिल में है वही बाहर दिखाई देता है
आफ़ताब शम्सी
ख़्वाब के आगे शिकस्त-ए-ख़्वाब का था सामना
आफ़ताब इक़बाल शमीम
हिज्र-ज़ाद
आफ़ताब इक़बाल शमीम
पंजों के बल खड़े हुए शब की चटान पर
आफ़ताब इक़बाल शमीम
कहीं सोता न रह जाऊँ सदा दे कर जगाओ ना
आफ़ताब इक़बाल शमीम
हर किसी का हर किसी से राब्ता टूटा हुआ
आफ़ताब इक़बाल शमीम
अपनी कैफ़िय्यतें हर आन बदलती हुई शाम
आफ़ताब इक़बाल शमीम
गए ज़मानों की दर्द कजलाई भूली बिसरी किताब पढ़ कर
आफ़ताब हुसैन
क़दम क़दम पे किसी इम्तिहाँ की ज़द में है
आफ़ताब हुसैन
निगाह के लिए इक ख़्वाब भी ग़नीमत है
आफ़ताब हुसैन
मुनाफ़िक़त का निसाब पढ़ कर मोहब्बतों की किताब लिखना
आफ़ताब हुसैन
किसी तरह भी तो वो राह पर नहीं आया
आफ़ताब हुसैन
हर फूल है हवाओं के रुख़ पर खिला हुआ
आफ़ताब हुसैन
गए मंज़रों से ये क्या उड़ा है निगाह में
आफ़ताब हुसैन
धूप जब ढल गई तो साया नहीं
आफ़ताब हुसैन
देखे कोई तअल्लुक़-ए-ख़ातिर के रंग भी
आफ़ताब हुसैन
उम्र-ए-रफ़्ता मैं तिरे हाथ भी क्या आया हूँ
आफ़ताब अहमद
जब सफ़र 'अफ़सर' कभी करते नहीं
अफ़सर मेरठी