ख्वाब Poetry (page 103)
इक रात मैं सो नहीं सका था
अहमद अता
इक अश्क बहा होगा
अहमद अता
दोनों के जो दरमियाँ ख़ला है
अहमद अता
अब किसी ख़्वाब की ताबीर नहीं चाहता मैं
अहमद अशफ़ाक़
वो मिरी जुराअत-ए-कमयाब से ना-वाक़िफ़ हैं
अहमद अशफ़ाक़
जितनी हम चाहते थे उतनी मोहब्बत नहीं दी
अहमद अशफ़ाक़
अब किसी ख़्वाब की ताबीर नहीं चाहता मैं
अहमद अशफ़ाक़
अब मैं हूँ और ख़्वाब-ए-परेशाँ है मेरे साथ
अहमद अली बर्क़ी आज़मी
तख़्ता-ए-मश्क़-ए-सितम मुझ को बनाने वाला
अहमद अली बर्क़ी आज़मी
सुकून-ए-क़ल्ब किसी को नहीं मयस्सर आज
अहमद अली बर्क़ी आज़मी
नज़र बचा के वो हम से गुज़र गए चुप-चाप
अहमद अली बर्क़ी आज़मी
मैं सोज़-ए-दरूँ अपना दिखा भी नहीं सकता
अहमद अली बर्क़ी आज़मी
कर के असीर-ए-ग़म्ज़ा-ओ-नाज़-ओ-अदा मुझे
अहमद अली बर्क़ी आज़मी
अम्न-ओ-सुल्ह-ओ-आश्ती हो जैसे बीमारी का नाम
अहमद अली बर्क़ी आज़मी
आवाज़ का उस की ज़ेर-ओ-बम कुछ याद रहा कुछ भूल गए
अहमद अली बर्क़ी आज़मी
वो ख़्वाब जिस पे तीरा-शबी का गुमान था
आग़ाज़ बरनी
घर से निकलना जब मिरी तक़दीर हो गया
आग़ाज़ बरनी
न निकला मुँह से कुछ निकली न कुछ भी क़ल्ब-ए-मुज़्तर की
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
मिरे करीम इनायत से तेरी क्या न मिला
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
मैं ख़ुदी में मुब्तिला ख़ुद को मिटाने के लिए
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
एक धुँदला सा तसव्वुर है कि दिल भी था यहाँ
आग़ा हश्र काश्मीरी
याद में तेरी जहाँ को भूलता जाता हूँ मैं
आग़ा हश्र काश्मीरी
नहीं करते वो बातें आलम-ए-रूया में भी हम से
आग़ा हज्जू शरफ़
कभी जो यार को देखा तो ख़्वाब में देखा
आग़ा हज्जू शरफ़
सन्नाटे का आलम क़ब्र में है है ख़्वाब-ए-अदम आराम नहीं
आग़ा हज्जू शरफ़
नाहक़ ओ हक़ का उन्हें ख़ौफ़-ओ-ख़तर कुछ भी नहीं
आग़ा हज्जू शरफ़
ख़ुदा-मालूम किस की चाँद से तस्वीर मिट्टी की
आग़ा हज्जू शरफ़
घिसते घिसते पाँव में ज़ंजीर आधी रह गई
आग़ा हज्जू शरफ़
नौजवानी में अजब दिल की लगी होती है
अफ़ज़ल पेशावरी
न रोना रह गया बाक़ी न हँसना रह गया बाक़ी
अफ़ज़ाल नवेद