ख्वाब Poetry (page 26)
एक ख़्वाब
गुलज़ार
देखो आहिस्ता चलो
गुलज़ार
दस्तक
गुलज़ार
सहमा सहमा डरा सा रहता है
गुलज़ार
फूल ने टहनी से उड़ने की कोशिश की
गुलज़ार
गुलों को सुनना ज़रा तुम सदाएँ भेजी हैं
गुलज़ार
याद नहीं है
गुलनाज़ कौसर
शब डूब गई
गुलनाज़ कौसर
रात हर बार लिए
गुलनाज़ कौसर
हयात-ए-रवाँ
गुलनाज़ कौसर
एक परछाईं तसव्वुर की मिरे साथ रहे
गुलनार आफ़रीन
शायद अभी कमी सी मसीहाइयों में है
गुलनार आफ़रीन
शजर-ए-उम्मीद भी जल गया वो वफ़ा की शाख़ भी जल गई
गुलनार आफ़रीन
न पूछ ऐ मिरे ग़म-ख़्वार क्या तमन्ना थी
गुलनार आफ़रीन
दिल ने इक आह भरी आँख में आँसू आए
गुलनार आफ़रीन
दिल ब-अज़-काबा है याराँ जुब्बा-साई चाहिए
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
आइना है ये जहाँ इस में जमाल अपना है
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
तू सरहद-ए-ख़याल से आगे गुज़र गया
गुलाम जीलानी असग़र
जफ़ा-ए-दिल-शिकन
ग़ुलाम दस्तगीर मुबीन
जिस तरफ़ भी देखिए साया नहीं
गुहर खैराबादी
ज़िंदगी की रौशनी के इस्तिआरे ख़्वाब हैं
गुफ़्तार ख़याली
न होगा कोई मुझ सा महव-ए-तसव्वुर
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
ये इक तेरा जल्वा सनम चार सू है
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
क्यूँकर न ख़ुश हो सर मिरा लटक्का के दार में
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
किस क़दर मुझ को ना-तवानी है
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
दुआएँ माँगीं हैं मुद्दतों तक झुका के सर हाथ उठा उठा कर
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
भूला है बा'द-ए-मर्ग मुझे दोस्त याँ तलक
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
अपना हर उज़्व चश्म-ए-बीना है
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
बहुत वाक़िफ़ हैं लब-ए-आह-ओ-फ़ुग़ाँ से
गोर बचन सिंह दयाल मग़मूम
शब-ताब
गोपाल मित्तल