ख्वाब Poetry (page 36)
आह को बाद-ए-सबा दर्द को ख़ुशबू लिखना
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
अपने लोगों के नाम
फ़य्याजुद्दीन साइब
न तुम मेरे न दिल मेरा न जान-ए-ना-तवाँ मेरी
फ़य्याज़ हाशमी
किसी को सोचना दिल का गुदाज़ हो जाना
फ़य्याज़ फ़ारुक़ी
कहानी हो कोई भी तेरा क़िस्सा हो ही जाती है
फ़य्याज़ फ़ारुक़ी
कैसे आता है दबे पाँव गुनाहों का ख़याल
फ़े सीन एजाज़
उस की हर बात ने जादू सा किया था पहले
फ़े सीन एजाज़
ख़र्च जब हो गई जज़्बों की रक़म आप ही आप
फ़े सीन एजाज़
दिया जला के कोई चाँद पर रखा होगा
फ़े सीन एजाज़
बग़ैर नक़्शे के सारे मकान लगते हैं
फ़े सीन एजाज़
आँख और नींद के रिश्ते मुझे वापस कर दे
फ़े सीन एजाज़
बे-कैफ़ कट रही थी मुसलसल ये ज़िंदगी
फ़व्वाद अहमद
उस की गली में ज़र्फ़ से बढ़ कर मिला मुझे
फ़व्वाद अहमद
मैं बोली तेरे लब पर है हँसी मेरी
फ़ौज़िया रबाब
नहीं ख़याल तो फिर इंतिज़ार किस का है
फ़ातिमा वसीया जायसी
दिल में मोहब्बतों के सिवा और कुछ नहीं
फ़ातिमा वसीया जायसी
दिल में इस का ख़याल क्यूँ आया
फ़ातिमा वसीया जायसी
दिखाई देता है जो कुछ कहीं वो ख़्वाब न हो
फ़ातिमा हसन
मौसम की पहली बारिश
फ़ातिमा हसन
ज़मीं से रिश्ता-ए-दीवार-ओ-दर भी रखना है
फ़ातिमा हसन
यादों के सब रंग उड़ा कर तन्हा हूँ
फ़ातिमा हसन
सुकून-ए-दिल के लिए इश्क़ तो बहाना था
फ़ातिमा हसन
मिरी ज़मीं पे लगी आप के नगर में लगी
फ़ातिमा हसन
क्या कहूँ उस से कि जो बात समझता ही नहीं
फ़ातिमा हसन
किस से बिछड़ी कौन मिला था भूल गई
फ़ातिमा हसन
ख़्वाब गिरवी रख दिए आँखों का सौदा कर दिया
फ़ातिमा हसन
कहो तो नाम मैं दे दूँ इसे मोहब्बत का
फ़ातिमा हसन
जिन ख़्वाहिशों को देखती रहती थी ख़्वाब में
फ़ातिमा हसन
जिन ख़्वाहिशों को देखती रहती थी ख़्वाब में
फ़ातिमा हसन
कभी तो हर्फ़-ए-दुआ यूँ ज़बाँ तलक आए
फ़सीहुल्ला नक़ीब