ख्वाब Poetry (page 35)
इक तेरा आसरा है फ़क़त ऐ ख़याल-ए-दोस्त
फ़िगार उन्नावी
एक ख़्वाब-ओ-ख़याल है दुनिया
फ़िगार उन्नावी
ग़म-ए-जानाँ से रंगीं और कोई ग़म नहीं होता
फ़िगार उन्नावी
ख़राब-हाल हूँ हर हाल में ख़राब रहा
फ़ज़लुर्रहमान
रात को ख़्वाब बहुत देखे हैं
फ़ज़्ल ताबिश
सफ़र
फ़ज़्ल ताबिश
जब जंगल बस्ती में आया
फ़ज़्ल ताबिश
रिश्ता खुजियाया हुआ कुत्ता है
फ़ज़्ल ताबिश
मैं उस के ख़्वाब में कब जा के देख पाया हूँ
फ़ज़्ल ताबिश
जिन ख़्वाबों से नींद उड़ जाए ऐसे ख़्वाब सजाए कौन
फ़ज़्ल ताबिश
इस कमरे में ख़्वाब रक्खे थे कौन यहाँ पर आया था
फ़ज़्ल ताबिश
अस्बाब-ए-ज़िंदगी की हर इक चीज़ है गराँ
फ़ज़्ल अहमद करीम फ़ज़ली
मैं इक थका हुआ इंसान और क्या करता
फ़ाज़िल जमीली
सुख़न जो उस ने कहे थे गिरह से बाँध लिए
फ़ाज़िल जमीली
मिसाल-ए-शम्अ जला हूँ धुआँ सा बिखरा हूँ
फ़ाज़िल जमीली
मैं जिस जगह हूँ वहाँ बूद-ओ-बाश किस की है
फ़ाज़िल जमीली
ख़्वाब में देख रहा हूँ कि हक़ीक़त में उसे
फ़ाज़िल जमीली
ख़िज़ाँ का रंग दरख़्तों पे आ के बैठ गया
फ़ाज़िल जमीली
दास्तानों में मिले थे दास्ताँ रह जाएँगे
फ़ाज़िल जमीली
वो बर्क़ का हो कि मौजों के पेच-ओ-ताब का रंग
फ़ाज़िल अंसारी
मिरे ज़ख़्म-ए-जिगर को ज़ख़्म-ए-दामन-दार होना था
फ़ाज़िल अंसारी
ऐ कहकशाँ गुज़र के तिरी रहगुज़र से हम
फ़ाज़िल अंसारी
आँखों के ख़्वाब दिल की जवानी भी ले गया
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
वही रिवायत गज़ीदा-दानिश वही हिकायत किताब वाली
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
उदास देख के वजह-ए-मलाल पूछेगा
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
मुझे मंज़ूर काग़ज़ पर नहीं पत्थर पे लिख देना
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
मुद्दतों के बाद फिर कुंज-ए-हिरा रौशन हुआ
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
फ़ुज़ूल शय हूँ मिरा एहतिराम मत करना
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
चंद साँसें हैं मिरा रख़्त-ए-सफ़र ही कितना
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
आँखों के ख़्वाब दिल की जवानी भी ले गया
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी