ख्वाब Poetry (page 33)
धमकी में मर गया जो न बाब-ए-नबर्द था
ग़ालिब
दर्द से मेरे है तुझ को बे-क़रारी हाए हाए
ग़ालिब
दहर में नक़्श-ए-वफ़ा वजह-ए-तसल्ली न हुआ
ग़ालिब
चाक की ख़्वाहिश अगर वहशत ब-उर्यानी करे
ग़ालिब
बिसात-ए-इज्ज़ में था एक दिल यक क़तरा ख़ूँ वो भी
ग़ालिब
बज़्म-ए-शाहंशाह में अशआर का दफ़्तर खुला
ग़ालिब
बाग़ पा कर ख़फ़क़ानी ये डराता है मुझे
ग़ालिब
अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़ के क़ाबिल नहीं रहा
ग़ालिब
आमद-ए-सैलाब-ए-तूफ़ान-ए-सदा-ए-आब है
ग़ालिब
आईना क्यूँ न दूँ कि तमाशा कहें जिसे
ग़ालिब
आ कि मिरी जान को क़रार नहीं है
ग़ालिब
पैक-ए-ख़याल भी है अजब क्या जहाँ-नुमा
जोर्ज पेश शोर
इसी ख़याल में दिन-रात मैं तड़पता हूँ
जोर्ज पेश शोर
इक ख़याल-ओ-ख़्वाब है ए 'शोर' ये बज़्म-ए-जहाँ
जोर्ज पेश शोर
पैक-ए-ख़याल भी है अजब क्या जहाँ-नुमा
जोर्ज पेश शोर
दिल अगर माइल-ए-इ'ताब न हो
ग़व्वास क़ुरैशी
अगर हो चश्म-ए-हक़ीक़त तो देख क्या हूँ मैं
ग़व्वास क़ुरैशी
लम्हा गुज़र गया है कि अर्सा गुज़र गया
गौतम राजऋषि
शाइरी बात नहीं गर्म-ए-सुख़न होने की
गौहर होशियारपुरी
सर पर कोई आसमान रख दे
गौहर होशियारपुरी
मता-ए-इश्क़ ज़रा और सर्फ़-ए-नाज़ तो हो
गौहर होशियारपुरी
मैं ख़ुद ही ख़ूगर-ए-ख़लिश-ए-जुस्तुजू न था
गौहर होशियारपुरी
कैसे डूबा डूब गया
गौहर होशियारपुरी
जाती रुत से प्यार करोगे
गौहर होशियारपुरी
दिल सिलसिला-ए-शौक़ की तश्हीर भी चाहे
गौहर होशियारपुरी
दिल सिलसिला-ए-शौक़ की तश्हीर भी चाहे
गौहर होशियारपुरी
सामने आँखों के घर का घर बने और टूट जाए
गणेश बिहारी तर्ज़
ये सच है हम को भी खोने पड़े कुछ ख़्वाब कुछ रिश्ते
फ़ुज़ैल जाफ़री
तिरी बदन में मेरे ख़्वाब मुस्कुराते हैं
फ़ुज़ैल जाफ़री
मैं उजड़ा शहर था तपता था दश्त के मानिंद
फ़ुज़ैल जाफ़री