Heart Broken Poetry (page 242)
अपना घर बाज़ार में क्यूँ रख दिया
अासिफ़ा निशात
सदियों से अजनबी
अासिफ़ शफ़ी
ये मो'जिज़ा भी किसी रोज़ कर ही जाना है
अासिफ़ शफ़ी
ये भी करना पड़ा मोहब्बत में
अासिफ़ शफ़ी
उम्र सारी तिरी चाहत में बितानी पड़ जाए
अासिफ़ शफ़ी
राह-ए-जुनूँ पे चल परे जीना मुहाल कर लिया
अासिफ़ शफ़ी
जमाल-ए-यार को तस्वीर करने वाले थे
अासिफ़ शफ़ी
जहान-ए-हुस्न-ओ-नज़र से किनारा करना है
अासिफ़ शफ़ी
हर तरफ़ है फ़ुसूँ मोहब्बत का
अासिफ़ शफ़ी
फ़लक को किस ने इक परकार पर रक्खा हुआ है
अासिफ़ शफ़ी
एक यूसुफ़ के ख़रीदार हुए हैं हम लोग
अासिफ़ शफ़ी
और अब ये दिल भी मेरा मानता है
अासिफ़ शफ़ी
ऐ मुझे 'मीर' के अशआ'र सुनाने वाले
अासिफ़ शफ़ी
सीने के बीच 'साक़िब' ऐसा है मरना जीना
अासिफ़ साक़िब
किस दर्जा मुनाफ़िक़ हैं सब अहल-ए-हवस 'साक़िब'
अासिफ़ साक़िब
दिल की मौजों की तड़प मेरी सदा में आए
अासिफ़ साक़िब
ओझल हुई नज़र से बे-बाल-ओ-पर गई है
अासिफ़ साक़िब
किसे मजाल जो टोके मिरी उड़ानों को
अासिफ़ साक़िब
झंकार है मौजों की बहते हुए पानी से
अासिफ़ साक़िब
ग़ज़ल में दर्द का जादू मुझी को होना था
अासिफ़ साक़िब
दिल की मौजों की तड़प मेरी सदा में आए
अासिफ़ साक़िब
बारिश कैसी जादूगर है
अासिफ़ साक़िब
अजनबी मुझ से आ गले मिल ले
आसिफ़ रज़ा
तख़्लीक़
आसिफ़ रज़ा
राज़
आसिफ़ रज़ा
मक़्सूद-अली-'दीवाना'
आसिफ़ रज़ा
दूर की शहज़ादी
आसिफ़ रज़ा
ये मिरी बज़्म नहीं है लेकिन
आसिफ़ रज़ा
साहिल-ए-इंतिज़ार में तन्हा
आसिफ़ रज़ा
दिल और तरह आज तो घबराया हुआ है
आसिफ़ रज़ा