Heart Broken Poetry (page 240)
अपनी सदा की गूँज ही तुझ को डरा न दे
असलम अंसारी
ऐन-मुमकिन है किसी तर्ज़-ए-अदा में आए
असलम अंसारी
बाम-ओ-दर पर उतरने वाली धूप
आसिमा ताहिर
नज़्म
आसिमा ताहिर
ज़ख़्म खा के भी मुस्कुराते हैं
आसिमा ताहिर
ये सोचा ही नहीं था तिश्नगी में
आसिमा ताहिर
तेरी यादें बहाल रखती है
आसिमा ताहिर
सुनहरी धूप से चेहरा निखार लेती हूँ
आसिमा ताहिर
सदियों को बेहाल किया था
आसिमा ताहिर
पौ फटते ही ट्रेन की सीटी जब कानों में गूँजती है
आसिमा ताहिर
किस के मातम में रो रही है रात
आसिमा ताहिर
ख़ुद मैं धूनी रमाए बैठी हूँ
आसिमा ताहिर
अपनी हालत पे आँसू बहाने लगे
आसिमा ताहिर
अपनी आँखें जो बंद कर देखूँ
आसिमा ताहिर
ज़ाविया धूप ने कुछ ऐसा बनाया है कि हम
आसिम वास्ती
ये हम-सफ़र तो सभी अजनबी से लगते हैं
आसिम वास्ती
मैं इंहिमाक में ये किस मक़ाम तक पहुँचा
आसिम वास्ती
अजीब शोर मचाने लगे हैं सन्नाटे
आसिम वास्ती
वक़्त बे-वक़्त ये पोशाक मिरी ताक में है
आसिम वास्ती
तुम इंतिज़ार के लम्हे शुमार मत करना
आसिम वास्ती
तुम भटक जाओ तो कुछ ज़ौक़-ए-सफ़र आ जाएगा
आसिम वास्ती
सामने रह कर न होना मसअला मेरा भी है
आसिम वास्ती
मिस्र फ़िरऔन की तहवील में आया हुआ है
आसिम वास्ती
मिरी नज़र मिरा अपना मुशाहिदा है कहाँ
आसिम वास्ती
मौजूद जो नहीं वही देखा बना हुआ
आसिम वास्ती
मकाँ से दूर कहीं ला-मकाँ से होता है
आसिम वास्ती
होंटों को फूल आँख को बादा नहीं कहा
आसिम वास्ती
हर तरफ़ हद्द-ए-नज़र तक सिलसिला पानी का है
आसिम वास्ती
है नींद अभी आँख में पल भर में नहीं है
आसिम वास्ती
है मुस्तक़िल यही एहसास कुछ कमी सी है
आसिम वास्ती