Heart Broken Poetry (page 238)
लुटी बहार का सूखा गुलाब रहने दो
असलम हबीब
किसी की याद का साया था या कि झोंका था
असलम हबीब
कट गईं सारी पतंगें डोर से
असलम हबीब
दोस्ती को आम करना चाहता है
असलम हबीब
आँख को अश्क बना के देख
असलम हबीब
धनक की बूँद
असलम फ़र्रुख़ी
ज़द पे आ जाएगा जो कोई तो मर जाएगा
असलम फ़र्रुख़ी
ये हिकायत तमाम को पहुँची
असलम फ़र्रुख़ी
हंगामा-ए-हस्ती से गुज़र क्यूँ नहीं जाते
असलम फ़र्रुख़ी
आग सी लग रही है सीने में
असलम फ़र्रुख़ी
शाम का रक़्स
असलम इमादी
मौत का इंतिज़ार सफ़ेद चाक से
असलम इमादी
खोखले बर्तन के होंट
असलम इमादी
वो शब-ए-ग़म जो कम अँधेरी थी
असलम इमादी
तमाम खेल-तमाशों के दरमियान वही
असलम इमादी
कोशिश है गर उस की कि परेशान करेगा
असलम इमादी
दिल की धड़कन अब रग-ए-जाँ के बहुत नज़दीक है
असलम इमादी
लिबास-ए-गुल में वो ख़ुशबू के ध्यान से निकला
असलम बदर
सिलसिला रोने का सदियों से चला आता है
असलम आज़ाद
न दश्त ओ दर से अलग था न जंगलों से जुदा
असलम आज़ाद
किसी तरह न तिलिस्म-ए-सुकूत टूट सका
असलम आज़ाद
दोस्तों के साथ दिन में बैठ कर हँसता रहा
असलम आज़ाद
धूप के बादल बरस कर जा चुके थे और मैं
असलम आज़ाद
ज़हर
असलम आज़ाद
कतबा
असलम आज़ाद
आहट
असलम आज़ाद
वो क्या है कौन है ये तो ज़रा बता मुझ को
असलम आज़ाद
वक़्त का कुछ रुका सा धारा है
असलम आज़ाद
उड़ते लम्हों के भँवर में कोई फँसता ही नहीं
असलम आज़ाद
रास्ता सुनसान था तो मुड़ के देखा क्यूँ नहीं
असलम आज़ाद