Heart Broken Poetry (page 239)
कोई दीवार सलामत है न अब छत मेरी
असलम आज़ाद
किश्त-ए-दिल वीराँ सही तुख़्म-ए-हवस बोया नहीं
असलम आज़ाद
कहीं पे क़ुर्ब की लज़्ज़त का इक़्तिबास नहीं
असलम आज़ाद
कहीं पे क़ुर्ब की लज़्ज़त का इक़्तिबास नहीं
असलम आज़ाद
जगमगाती ख़्वाहिशों का नूर फैला रात भर
असलम आज़ाद
हर सू है तारीकी छाई तुम भी चुप और हम भी चुप
असलम आज़ाद
हमारी याद उन्हें आ गई तो क्या होगा
असलम आज़ाद
बस एक बार उसे रौशनी में देखा था
असलम आज़ाद
अजीब शख़्स है मुझ को तो वो दिवाना लगे
असलम आज़ाद
आँखों से मैं ने चख लिया मौसम के ज़हर को
असलम आज़ाद
रग-ए-हर-साज़ ये कहती है कि ऐ नग़्मा-तराज़
असलम अंसारी
जिसे दरपेश जुदाई हो उसे क्या मालूम
असलम अंसारी
मय-शिकस्ता-दिली ऐ हरीफ़-ए-ज़ौक़-ए-नुमू
असलम अंसारी
फ़क़त हर्फ़-ए-तमन्ना क्या है
असलम अंसारी
एक नज़्म
असलम अंसारी
ऐ ज़मिस्ताँ की हवा तेज़ न चल
असलम अंसारी
वो रंग उड़े हैं कुछ अब के बरस बहारों के
असलम अंसारी
वो नख़्ल जो बार-वर हुए हैं
असलम अंसारी
मुझे तो ये भी फ़रेब-ए-हवास लगता है
असलम अंसारी
मैं ने रोका भी नहीं और वो ठहरा भी नहीं
असलम अंसारी
लरज़ लरज़ के दिल-ए-ना-तवाँ ठहर ही न जाए
असलम अंसारी
कुछ तो ग़म-ख़ाना-ए-हस्ती में उजाला होता
असलम अंसारी
ख़फ़ा न हो कि तिरा हुस्न ही कुछ ऐसा था
असलम अंसारी
जब हमें इज़्न तमाशा होगा
असलम अंसारी
हर शख़्स इस हुजूम में तन्हा दिखाई दे
असलम अंसारी
गुबार-ए-एहसास-ए-पेश-ओ-पस की अगर ये बारीक तह हटाएँ
असलम अंसारी
एक समुंदर एक किनारा एक सितारा काफ़ी है
असलम अंसारी
इक बर्ग बर्ग दिन की ख़बर चाहिए मुझे
असलम अंसारी
दर्स-ए-आदाब-ए-जुनूँ याद दिलाने वाले
असलम अंसारी
बुझी है आतिश-ए-रंग-ए-बहार आहिस्ता आहिस्ता
असलम अंसारी