Heart Broken Poetry (page 243)
वो बे-हुनर हूँ कि है ज़िंदगी वबाल मुझे
अासिफ़ जमाल
सहरा से भी वीराँ मिरा घर है कि नहीं है
अासिफ़ जमाल
साए की तरह कोई मिरे साथ लगा था
अासिफ़ जमाल
मगर नहीं था फ़क़त 'मीर' ख़्वार मैं भी था
अासिफ़ जमाल
कैसी आशुफ़्तगी-ए-सर है यहाँ
अासिफ़ जमाल
हम भी थे गोशा-गीर कि गुमनाम थे बहुत
अासिफ़ जमाल
दिल है कि हमें फिर से उधर ले के चला है
अासिफ़ जमाल
भूले हुए हैं सब कि है कार-ए-जहाँ बहुत
अासिफ़ जमाल
आँख बे-ख़्वाब हुई है कैसी
अासिफ़ जमाल
सदा-ए-क़ैस शौक़-ए-दश्त-पैमाई नमी-दानम
अासिफ़ अंजुम
रेत आँखों में भर गया दरिया
अासिफ़ अंजुम
कैसा तिलिस्म आज ये तारी है जिस्म में
अासिफ़ अंजुम
इक दिन ख़ुद को अपने अंदर फेंकूँगा
अासिफ़ अंजुम
तेरे आने का गुमाँ होता है
अशरफ़ यूसुफ़
दिए की आँख से जब गुफ़्तुगू नहीं होती
अशरफ़ यूसुफ़
उन से मिला तो फिर मैं किसी का नहीं रहा
अशरफ़ शाद
थीं ज़मीनें गुम-शुदा और आसमाँ मिलता न था
अशरफ़ शाद
निकली वो ज़िंदगी से तो पामाल हो गया
अशरफ़ शाद
इस की जुदाई कैसे कमालात कर गई
अशरफ़ शाद
चाँद तारों से भरा ये आसमाँ दे जाऊँगा
अशरफ़ शाद
पर्दे मिरी निगाह के भी दरमियाँ न थे
अशरफ़ रफ़ी
अहद-ए-वफ़ा न याद दिलाएँ तो क्या करें
अशरफ़ रफ़ी
बसीत-ए-दश्त की हुर्मत को बाम-ओ-दर दे दे
अशरफ़ जावेद
गुल-ए-ख़ुर्शीद खिलाऊँगा चला जाऊँगा
अशरफ़ जावेद
बसीत-ए-दश्त की हुर्मत को बाम-ओ-दर दे दे
अशरफ़ जावेद
बदल के देख लिए ज़ाविए उड़ानों के
अशरफ़ जावेद
ऐ शैख़ अगर कुफ़्र से इस्लाम जुदा है
अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ
ख़ून आँखों से निकलता ही रहा
अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ
इस जौर ओ जफ़ा से तिरे ज़िन्हार न टूटे
अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ
हरगिज़ मिरा वहशी न हुआ राम किसी का
अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ