Hope Poetry (page 11)
क्यूँ देखिए न हुस्न-ए-ख़ुदा-दाद की तरफ़
इम्दाद इमाम असर
किसी का दिल को रहा इंतिज़ार सारी रात
इम्दाद इमाम असर
कब ग़ैर हुआ महव तिरी जल्वागरी का
इम्दाद इमाम असर
जफ़ाएँ होती हैं घुटता है दम ऐसा भी होता है
इम्दाद इमाम असर
हुस्न की जिंस ख़रीदार लिए फिरती है
इम्दाद इमाम असर
वस्ल में ज़िक्र ग़ैर का न करो
इमदाद अली बहर
वक़्त-ए-आख़िर हमें दीदार दिखाया न गया
इमदाद अली बहर
तारे गिनते रात कटती ही नहीं आती है नींद
इमदाद अली बहर
शोर है उस सब्ज़ा-ए-रुख़्सार का
इमदाद अली बहर
नहीं होने का ये ख़ून-ए-जिगर बंद
इमदाद अली बहर
मैं सियह-रू अपने ख़ालिक़ से जो ने'मत माँगता
इमदाद अली बहर
मैं गिला तुम से करूँ ऐ यार किस किस बात का
इमदाद अली बहर
महरम के सितारे टूटते हैं
इमदाद अली बहर
ख़ुर्शीद-रुख़ों का सामना है
इमदाद अली बहर
कभी तो देखे हमारी अरक़-फ़िशानी धूप
इमदाद अली बहर
कभी देखें जो रू-ए-यार दरख़्त
इमदाद अली बहर
जज़्ब-ए-उल्फ़त ने दिखाया असर अपना उल्टा
इमदाद अली बहर
जाते है ख़ानक़ाह से वाइज़ सलाम है
इमदाद अली बहर
जल्वा-ए-अर्बाब-ए-दुनिया देखिए
इमदाद अली बहर
जड़ाव चूड़ियों के हाथों में फबन क्या ख़ूब
इमदाद अली बहर
जब दस्त-बस्ता की नहीं उक़्दा-कुशा नमाज़
इमदाद अली बहर
इस तरह ज़ीस्त बसर की कोई पुरसाँ न हुआ
इमदाद अली बहर
इफ़्शा हुए असरार-ए-जुनूँ जामा-दरी से
इमदाद अली बहर
ईफ़ा-ए-व'अदा आप से ऐ यार हो चुका
इमदाद अली बहर
हम नाक़िसों के दौर में कामिल हुए तो क्या
इमदाद अली बहर
हम ख़िज़ाँ की अगर ख़बर रखते
इमदाद अली बहर
हम आज-कल हैं नामा-नवीसी की ताव पर
इमदाद अली बहर
हम-ज़ाद है ग़म अपना शादाँ किसे कहते हैं
इमदाद अली बहर
गया सब अंदोह अपने दिल का थमे अब आँसू क़रार आया
इमदाद अली बहर
गर्दिश-ए-चर्ख़ से क़याम नहीं
इमदाद अली बहर