Hope Poetry (page 12)
दम-ए-मर्ग बालीं पर आया तो होता
इमदाद अली बहर
दाग़ बैआ'ना हुस्न का न हुआ
इमदाद अली बहर
चूर सदमों से हो बईद नहीं
इमदाद अली बहर
चुनने न दिया एक मुझे लाख झड़े फूल
इमदाद अली बहर
चार दिन है ये जवानी न बहुत जोश में आ
इमदाद अली बहर
बुतो ख़ुदा पे न रक्खो मोआ'मला दिल का
इमदाद अली बहर
बग़ैर यार गवारा नहीं कबाब शराब
इमदाद अली बहर
बद-तालई का इलाज क्या हो
इमदाद अली बहर
ऐसी कोयल न पपीहे की है प्यारी आवाज़
इमदाद अली बहर
आज़ुर्दा हो गया वो ख़रीदार बे-सबब
इमदाद अली बहर
आतिश-ए-बाग़ ऐसी भड़की है कि जलती है हवा
इमदाद अली बहर
आतिश-ए-बाग़ ऐसे भड़की है कि जलती है हवा
इमदाद अली बहर
आश्ना कोई बा-वफ़ा न मिला
इमदाद अली बहर
आहों से होंगे गुम्बद-ए-हफ़्त-आसमाँ ख़राब
इमदाद अली बहर
उस पर ही भेजता है वो आफ़त भी मौत भी
इम्दाद आकाश
ने आदमी पसंद न इस को ख़ुदा पसंद
इम्दाद आकाश
ख़्वाब ही में नज़र आ जाए शब-ए-हिज्र कहीं
इमाम बख़्श नासिख़
जुस्तुजू करनी हर इक अम्र में नादानी है
इमाम बख़्श नासिख़
आती जाती है जा-ब-जा बदली
इमाम बख़्श नासिख़
ज़ोर है गर्मी-ए-बाज़ार तिरे कूचे में
इमाम बख़्श नासिख़
वो बेज़ार मुझ से हुआ ज़ार मैं हूँ
इमाम बख़्श नासिख़
सौ क़िस्सों से बेहतर है कहानी मिरे दिल की
इमाम बख़्श नासिख़
सनम कूचा तिरा है और मैं हूँ
इमाम बख़्श नासिख़
रिफ़अत कभी किसी की गवारा यहाँ नहीं
इमाम बख़्श नासिख़
हैं अश्क मिरी आँखों में क़ुल्ज़ुम से ज़्यादा
इमाम बख़्श नासिख़
राखी बंधन
इमाम अाज़म
टिमटिमाता हुआ मंदिर का दिया हो जैसे
इमाम अाज़म
क़द बढ़ाने के लिए बौनों की बस्ती में चलो
इमाम अाज़म
कोई क़र्या कोई दयार हो कहीं हम अकेले नहीं रहे
इलियास इश्क़ी
ये बहार वो है जहाँ रही असर-ए-ख़िज़ाँ से बरी रही
इलियास इश्क़ी