Hope Poetry (page 14)
कोई वजूद है दुनिया में कोई परछाईं
इफ़्तिख़ार मुग़ल
जमाल-गाह-ए-तग़ज़्ज़ुल की ताब-ओ-तब तिरी याद
इफ़्तिख़ार मुग़ल
साएबान
इफ़्तेख़ार जालिब
धुँद
इफ़्तेख़ार जालिब
वो नहीं मिलता मुझे इस का गिला अपनी जगह
इफ़्तिख़ार इमाम सिद्दीक़ी
वो ख़्वाब था बिखर गया ख़याल था मिला नहीं
इफ़्तिख़ार इमाम सिद्दीक़ी
बिखर ही जाऊँगा मैं भी हवा उदासी है
इफ़्तिख़ार इमाम सिद्दीक़ी
मलबे से जो मिली हैं वो लाशें दिखाइए
इफ़्तिख़ार फलक काज़मी
दश्त-ए-बे-सम्त में रुकना भी सफ़र ऐसा था
इफ़्तिख़ार बुख़ारी
बनती है सँवरती है बिखर जाती है दुनिया
इफ़्तिख़ार बुख़ारी
ये मोजज़ा भी किसी की दुआ का लगता है
इफ़्तिख़ार आरिफ़
ये बस्तियाँ हैं कि मक़्तल दुआ किए जाएँ
इफ़्तिख़ार आरिफ़
वही चराग़ बुझा जिस की लौ क़यामत थी
इफ़्तिख़ार आरिफ़
उमीद-ओ-बीम के मेहवर से हट के देखते हैं
इफ़्तिख़ार आरिफ़
मैं ज़िंदगी की दुआ माँगने लगा हूँ बहुत
इफ़्तिख़ार आरिफ़
कोई तो फूल खिलाए दुआ के लहजे में
इफ़्तिख़ार आरिफ़
एक चराग़ और एक किताब और एक उम्मीद असासा
इफ़्तिख़ार आरिफ़
दुआएँ याद करा दी गई थीं बचपन में
इफ़्तिख़ार आरिफ़
दुआ को हात उठाते हुए लरज़ता हूँ
इफ़्तिख़ार आरिफ़
बुलंद हाथों में ज़ंजीर डाल देते हैं
इफ़्तिख़ार आरिफ़
अजीब ही था मिरे दौर-ए-गुमरही का रफ़ीक़
इफ़्तिख़ार आरिफ़
तजाहुल-ए-आरिफ़ाना
इफ़्तिख़ार आरिफ़
सहरा में एक शाम
इफ़्तिख़ार आरिफ़
रौशन दिल वालों के नाम
इफ़्तिख़ार आरिफ़
निरवान
इफ़्तिख़ार आरिफ़
मुकालिमा
इफ़्तिख़ार आरिफ़
मोहब्बत की एक नज़्म
इफ़्तिख़ार आरिफ़
मिरा ज़ेहन मुझ को रहा करे
इफ़्तिख़ार आरिफ़
कुछ देर पहले नींद से
इफ़्तिख़ार आरिफ़
कूच
इफ़्तिख़ार आरिफ़