Hope Poetry (page 15)
इंतिबाह
इफ़्तिख़ार आरिफ़
इल्तिजा
इफ़्तिख़ार आरिफ़
हवाएँ अन-पढ़ हैं
इफ़्तिख़ार आरिफ़
गुमनाम सिपाही की क़ब्र पर
इफ़्तिख़ार आरिफ़
एक उदास शाम के नाम
इफ़्तिख़ार आरिफ़
एक था राजा छोटा सा
इफ़्तिख़ार आरिफ़
एक रुख़
इफ़्तिख़ार आरिफ़
एक ख़्वाब की दूरी पर
इफ़्तिख़ार आरिफ़
एक कहानी बहुत पुरानी
इफ़्तिख़ार आरिफ़
बद-शुगूनी
इफ़्तिख़ार आरिफ़
और हवा चुप रही
इफ़्तिख़ार आरिफ़
आख़िरी आदमी का रजज़
इफ़्तिख़ार आरिफ़
ये मो'जिज़ा भी किसी की दुआ का लगता है
इफ़्तिख़ार आरिफ़
ये बस्तियाँ हैं कि मक़्तल दुआ किए जाएँ
इफ़्तिख़ार आरिफ़
वही प्यास है वही दश्त है वही घराना है
इफ़्तिख़ार आरिफ़
उमीद-ओ-बीम के मेहवर से हट के देखते हैं
इफ़्तिख़ार आरिफ़
थकन तो अगले सफ़र के लिए बहाना था
इफ़्तिख़ार आरिफ़
सुख़न-ए-हक़ को फ़ज़ीलत नहीं मिलने वाली
इफ़्तिख़ार आरिफ़
सितारा-वार जले फिर बुझा दिए गए हम
इफ़्तिख़ार आरिफ़
सब चेहरों पर एक ही रंग और सब आँखों में एक ही ख़्वाब
इफ़्तिख़ार आरिफ़
रविश में गर्दिश-ए-सय्यारगाँ से अच्छी है
इफ़्तिख़ार आरिफ़
मिरे ख़ुदा मुझे इतना तो मो'तबर कर दे
इफ़्तिख़ार आरिफ़
कुछ भी नहीं कहीं नहीं ख़्वाब के इख़्तियार में
इफ़्तिख़ार आरिफ़
कोई तो फूल खिलाए दुआ के लहजे में
इफ़्तिख़ार आरिफ़
कोई मुज़्दा न बशारत न दुआ चाहती है
इफ़्तिख़ार आरिफ़
कोई जुनूँ कोई सौदा न सर में रक्खा जाए
इफ़्तिख़ार आरिफ़
खज़ाना-ए-ज़र-ओ-गौहर पे ख़ाक डाल के रख
इफ़्तिख़ार आरिफ़
ख़ौफ़ के सैल-ए-मुसलसल से निकाले मुझे कोई
इफ़्तिख़ार आरिफ़
ख़ल्क़ ने इक मंज़र नहीं देखा बहुत दिनों से
इफ़्तिख़ार आरिफ़
कहीं से कोई हर्फ़-ए-मो'तबर शायद न आए
इफ़्तिख़ार आरिफ़