Hope Poetry (page 17)

ख़मोश रह के ज़वाल-ए-सुख़न का ग़म किए जाएँ

इदरीस बाबर

दोस्त कुछ और भी हैं तेरे अलावा मिरे दोस्त

इदरीस बाबर

देखा नहीं चाँद ने पलट कर

इदरीस बाबर

जब आ जाती है दुनिया घूम फिर कर अपने मरकज़ पर

इबरत मछलीशहरी

थी हौसले की बात ज़माने में ज़िंदगी

इब्राहीम अश्क

कोई तो होगा जिस को मिरा इंतिज़ार है

इब्राहीम अश्क

कोई भरोसा नहीं अब्र के बरसने का

इब्राहीम अश्क

उस की इक दुनिया हूँ मैं और मेरी इक दुनिया है वो

इब्राहीम अश्क

रू-ब-रू उन के कोई हर्फ़ अदा क्या करते

इब्राहीम अश्क

मुझे न देखो मिरे जिस्म का धुआँ देखो

इब्राहीम अश्क

मिशअल-ब-कफ़ कभी तो कभी दिल-ब-दस्त था

इब्राहीम अश्क

मैं कब रहीन-ए-रेग-ए-बयाबान-ए-यास था

इब्राहीम अश्क

करें सलाम उसे तो कोई जवाब न दे

इब्राहीम अश्क

गुलशन में ले के चल किसी सहरा में ले के चल

इब्राहीम अश्क

देखा तो कोई और था सोचा तो कोई और

इब्राहीम अश्क

दैर-ओ-हरम में दश्त-ओ-बयाबान-ओ-बाग़ में

इब्राहीम होश

देख कर मेरा दश्त-ए-तन्हाई

इब्न-ए-सफ़ी

ज़ेहन से दिल का बार उतरा है

इब्न-ए-सफ़ी

फिर से वो लौट कर नहीं आया

इब्न-ए-मुफ़्ती

हम से शायद मो'तबर ठहरी सबा

इब्न-ए-मुफ़्ती

अजब है खेल कैरम का

इब्न-ए-मुफ़्ती

शौक़ जब भी बंदगी का रहनुमा होता नहीं

इब्न-ए-मुफ़्ती

फिर से वो लौट कर नहीं आया

इब्न-ए-मुफ़्ती

हम से मिलते थे सितारे आप के

इब्न-ए-मुफ़्ती

दिल वही अश्क-बार रहता है

इब्न-ए-मुफ़्ती

इक साल गया इक साल नया है आने को

इब्न-ए-इंशा

बे तेरे क्या वहशत हम को तुझ बिन कैसा सब्र ओ सुकूँ

इब्न-ए-इंशा

अपनी ज़बाँ से कुछ न कहेंगे चुप ही रहेंगे आशिक़ लोग

इब्न-ए-इंशा

ये कौन आया

इब्न-ए-इंशा

ये बातें झूटी बातें हैं

इब्न-ए-इंशा