Hope Poetry (page 16)
जुनूँ का रंग भी हो शोला-ए-नुमू का भी हो
इफ़्तिख़ार आरिफ़
जैसा हूँ वैसा क्यूँ हूँ समझा सकता था मैं
इफ़्तिख़ार आरिफ़
हम अपने रफ़्तगाँ को याद रखना चाहते हैं
इफ़्तिख़ार आरिफ़
ग़म-ए-जहाँ को शर्मसार करने वाले क्या हुए
इफ़्तिख़ार आरिफ़
ग़ैरों से दाद-ए-जौर-ओ-जफ़ा ली गई तो क्या
इफ़्तिख़ार आरिफ़
फ़ज़ा में वहशत-ए-संग-ओ-सिनाँ के होते हुए
इफ़्तिख़ार आरिफ़
दुख और तरह के हैं दुआ और तरह की
इफ़्तिख़ार आरिफ़
बिखर जाएँगे हम क्या जब तमाशा ख़त्म होगा
इफ़्तिख़ार आरिफ़
अज़ाब-ए-वहशत-ए-जाँ का सिला न माँगे कोई
इफ़्तिख़ार आरिफ़
अज़ाब ये भी किसी और पर नहीं आया
इफ़्तिख़ार आरिफ़
अहल-ए-मोहब्बत की मजबूरी बढ़ती जाती है
इफ़्तिख़ार आरिफ़
न दे जो दिल ही दुहाई तो कोई बात नहीं
इफ़तिख़ार अहमद फख्र
शौक़
इफ़्तिख़ार आज़मी
हासिल
इफ़्तिख़ार आज़मी
एहसास
इफ़्तिख़ार आज़मी
आप-बीती
इफ़्तिख़ार आज़मी
ज़ेहन ओ दिल के फ़ासले थे हम जिन्हें सहते रहे
इफ़्फ़त ज़र्रीं
जिस्म-ओ-जाँ की बस्ती में सिलसिले नहीं मिलते
इफ़्फ़त ज़र्रीं
घबरा गए हैं वक़्त की तन्हाइयों से हम
इफ़्फ़त ज़र्रीं
अजीब कर्ब-ए-मुसलसल दिल-ओ-नज़र में रहा
इफ़्फ़त ज़र्रीं
शब-ए-फ़ुर्क़त की तन्हाई का लम्हा
इफ़्फ़त अब्बास
रह-ए-जुस्तुजू में भटक गए तो किसी से कोई गिला नहीं
इफ़्फ़त अब्बास
नज़र जो आया उस पे ए'तिबार कर लिया गया
इफ़्फ़त अब्बास
ख़ूँ में तर सब्र की चादर कहाँ ले जाओगे
इफ़्फ़त अब्बास
है ये शहर-ए-इश्क़ याँ आब-ओ-हवा कुछ और है
इफ़्फ़त अब्बास
है ये मर मिटने का इनआ'म तुम्हें क्या मा'लूम
इफ़्फ़त अब्बास
एक मुद्दत से सर-ए-दोश-ए-हवा हूँ मैं भी
इफ़्फ़त अब्बास
वो गुल वो ख़्वाब-शार भी नहीं रहा
इदरीस बाबर
सो दुनिया में जीना बसना दिल को मरने मत देना
इदरीस बाबर
किसी के हाथ कहाँ ये ख़ज़ाना आता है
इदरीस बाबर