Hope Poetry (page 159)

न हो तुग़्यान-ए-मुश्ताक़ी तो मैं रहता नहीं बाक़ी

अल्लामा इक़बाल

मुझे आह-ओ-फ़ुग़ान-ए-नीम-शब का फिर पयाम आया

अल्लामा इक़बाल

मेरी नवा-ए-शौक़ से शोर हरीम-ए-ज़ात में

अल्लामा इक़बाल

मता-ए-बे-बहा है दर्द-ओ-सोज़-ए-आरज़ूमंदी

अल्लामा इक़बाल

मजनूँ ने शहर छोड़ा तो सहरा भी छोड़ दे

अल्लामा इक़बाल

ख़िरद के पास ख़बर के सिवा कुछ और नहीं

अल्लामा इक़बाल

गेसू-ए-ताबदार को और भी ताबदार कर

अल्लामा इक़बाल

फ़ितरत को ख़िरद के रू-ब-रू कर

अल्लामा इक़बाल

एजाज़ है किसी का या गर्दिश-ए-ज़माना

अल्लामा इक़बाल

दिगर-गूँ है जहाँ तारों की गर्दिश तेज़ है साक़ी

अल्लामा इक़बाल

असर करे न करे सुन तो ले मिरी फ़रियाद

अल्लामा इक़बाल

अनोखी वज़्अ' है सारे ज़माने से निराले हैं

अल्लामा इक़बाल

अमीन-ए-राज़ है मर्दान-ए-हूर की दरवेशी

अल्लामा इक़बाल

सफ़र है ज़ेहन का तो कोई रहनुमा ले जा

अलीमुल्लाह हाली

ना-शनासी का हमेशा ग़म रहा

अलीमुल्लाह हाली

तू है किस मंज़िल में तेरा बोल खाँ है दिल का ठार

अलीमुल्लाह

राह में हक़ के अज़ीज़ाँ आप को क़ुर्बां करो

अलीमुल्लाह

लगा कर इश्क़ का कजरा नयन को

अलीमुल्लाह

अक़्ल-ए-जुज़वी छोड़ कर ऐ यार फ़िक्र-ए-कुल करो

अलीमुल्लाह

अक़्ल को छोड़ इश्क़ में आ जा

अलीमुल्लाह

अबस क्यूँ उम्र सोने में गँवाया

अलीमुल्लाह

सुकूत-ए-शाम का हिस्सा तू मत बना मुझ को

अली ज़रयून

तीन मुख़्तसर नज़्में

अली ज़हीर लखनवी

एक पलटता हुआ मंज़र

अली ज़हीर लखनवी

दिल ये कहता है कि इक आलम-ए-मुज़्तर देखूँ

अली ज़हीर लखनवी

दर्द हर रंग से अतवार-ए-दुआ माँगे है

अली ज़हीर लखनवी

कुछ इस तरह वो दुआ-ओ-सलाम कर के गया

अली यासिर

आतिश-ए-इश्क़ में जलता रहा बुझता रहा दिल

अली वजदान

ये किस ने फ़ोन पे दी साल-ए-नौ की तहनियत मुझ को

अली सरदार जाफ़री

तू वो बहार जो अपने चमन में आवारा

अली सरदार जाफ़री