Hope Poetry (page 157)

ज़ख़्म दिल का ख़ूँ-चकाँ ऐसा न था

अलक़मा शिबली

जुनून-ए-शौक़-ए-मोहब्बत की आगही देना

अलक़मा शिबली

दश्त-दर-दश्त फिरा करता हूँ प्यासा हूँ मैं

अलक़मा शिबली

धावा बोलेगा बहुत जल्द ख़िज़ाँ का लश्कर

आलोक यादव

मिरी क़ुर्बतों की ख़ातिर यूँही बे-क़रार होता

आलोक यादव

गुलों की गर इनायत हो गई तो

आलोक यादव

भटका करूँगा कब तक राहों में तेरी आ कर

आलोक यादव

वो बे-असर था मुसलसल दलील करते हुए

आलोक मिश्रा

सवालों में ख़ुद भी है डूबी उदासी

आलोक मिश्रा

ख़ाक हो कर भी कब मिटूंगा मैं

आलोक मिश्रा

जाने किस बात से दुखा है बहुत

आलोक मिश्रा

चीख़ की ओर मैं खिंचा जाऊँ

आलोक मिश्रा

ये कौन तुम से अब कहे

अलमास शबी

उस जबीं पर जो बल पड़े शायद

अलमास शबी

सवाल कैसे करूँ मैं इस से जवाब है जो मिरी दुआ का

अलमास शबी

जाने किस मोड़ पर मैं ने देखा नहीं

अलमास शबी

दिया मुंडेर पे दिल की जला रही हूँ मैं

अलमास शबी

ये काएनात अभी ना-तमाम है शायद

अल्लामा इक़बाल

उमीद-ए-हूर ने सब कुछ सिखा रक्खा है वाइज़ को

अल्लामा इक़बाल

तमन्ना दर्द-ए-दिल की हो तो कर ख़िदमत फ़क़ीरों की

अल्लामा इक़बाल

सौदा-गरी नहीं ये इबादत ख़ुदा की है

अल्लामा इक़बाल

निकल जा अक़्ल से आगे कि ये नूर

अल्लामा इक़बाल

मिलेगा मंज़िल-ए-मक़्सूद का उसी को सुराग़

अल्लामा इक़बाल

मक़ाम-ए-शौक़ तिरे क़ुदसियों के बस का नहीं

अल्लामा इक़बाल

गुज़र जा अक़्ल से आगे कि ये नूर

अल्लामा इक़बाल

अंदाज़-ए-बयाँ गरचे बहुत शोख़ नहीं है

अल्लामा इक़बाल

ज़ोहद और रिंदी

अल्लामा इक़बाल

ज़ौक़ ओ शौक़

अल्लामा इक़बाल

वालिदा मरहूमा की याद में

अल्लामा इक़बाल

तुलू-ए-इस्लाम

अल्लामा इक़बाल