Hope Poetry (page 163)
तलाश-ए-आख़र
अली अकबर अब्बास
ज़रा हटे तो वो मेहवर से टूट कर ही रहे
अली अकबर अब्बास
ग़ुबार-ए-नूर है या कहकशाँ है या कुछ और
अली अकबर अब्बास
फिरता हूँ अपना नक़्श-ए-क़दम ढूँडता हुआ
अली अहमद जलीली
तुम जो आओगे तो मौसम दूसरा हो जाएगा
अली अहमद जलीली
काटी है ग़म की रात बड़े एहतिराम से
अली अहमद जलीली
आज जलती हुई हर शम्अ बुझा दी जाए
अली अहमद जलीली
वरक़ है मेरे सहीफ़े का आसमाँ क्या है
अली अब्बास उम्मीद
रूह की बात सुने जिस्म के तेवर देखे
अली अब्बास उम्मीद
मैं तो इक लम्हा-ए-परीदा रहा
अली अब्बास उम्मीद
हम हवा से बचा रहे थे जिन्हें
अलीना इतरत
आज फिर
अलीना इतरत
ज़िंदा रहने की ये तरकीब निकाली मैं ने
अलीना इतरत
ये किस मुहिम पर चले थे हम जिस में रास्ते पुर-ख़तर न आए
अलीना इतरत
सारे मौसम बदल गए शायद
अलीना इतरत
पुकारते पुकारते सदा ही और हो गई
अलीना इतरत
ख़िज़ाँ की ज़र्द सी रंगत बदल भी सकती है
अलीना इतरत
जुनूँ में दामन-ए-दिल गरचे तार तार हुआ
अलीना इतरत
बगूला बन के नाचता हुआ ये तन गुज़र गया
अलीना इतरत
वो अर्ज़-ए-ग़म पे मश्वरा-ए-इख़्तिसार दे
अलीम उस्मानी
वक़्त-ए-आख़िर जो बालीं पर आजाइयो
अलीम उस्मानी
मौत आई है ज़माने की तो मर जाने दो
अलीम उस्मानी
मैं नक़्श-हा-ए-ख़ून-ए-वफ़ा छोड़ जाऊँगा
अलीम उस्मानी
चराग़ शाम से आख़िर जलाएँ किस के लिए
अलीम उस्मानी
अब जाम निगाहों के नशा क्यूँ नहीं देते
अलीम उस्मानी
सिसकता चीख़ता एहसास था मिरे अंदर
अलीम सबा नवेदी
मैं जिस का मुंतज़िर हूँ वो मंज़र पुकार ले
अलीम सबा नवेदी
निकले तिरी महफ़िल से तो साथ न था कोई
अलीम मसरूर
इक राज़-ए-ग़म-ए-दिल जब ख़ुद रह न सका दिल तक
अलीम मसरूर
इक मुंतज़िर-ए-वादा की शम्अ जली होगी
अलीम मसरूर