Hope Poetry (page 180)
ज़माना हो गया है ख़्वाब देखे
अहमद शनास
ज़माना हो गया है ख़्वाब देखे
अहमद शनास
ये वक़्त रौशनी का मुख़्तसर है
अहमद शनास
यहाँ हर लफ़्ज़ मअनी से जुदा है
अहमद शनास
सुब्ह-ए-वजूद हूँ कि शब-ए-इंतिज़ार हूँ
अहमद शनास
जिस्म के बयाबाँ में दर्द की दुआ माँगें
अहमद शनास
है वाहिमों का तमाशा यहाँ वहाँ देखो
अहमद शनास
दश्त-ए-उम्मीद में ख़्वाबों का सफ़र करना था
अहमद शनास
बस इक जहान-ए-तहय्युर से आने वाला है
अहमद शनास
हमारे शहर की रिवायतों में एक ये भी था
अहमद शहरयार
यादों की तज्सीम पे मेहनत होती है
अहमद शहरयार
वो मर गया सदा-ए-नौहा-गर में कितनी देर है
अहमद शहरयार
नए ज़मानों की चाप तो सर पे आ खड़ी थी
अहमद शहरयार
अश्क भेजें मौज उभारें अब्र जारी कीजिए
अहमद शहरयार
आईना बन के अपना तमाशा दिखाएँ हम
अहमद शहरयार
शम्अ की तरह से जलना सीख औरों के लिए
अहमद शाहिद ख़ाँ
सारा आलम धुआँ धुआँ क्यूँ है
अहमद शाहिद ख़ाँ
जब तक ग़ुबार-ए-राह मिरा हम-सफ़र रहा
अहमद शाहिद ख़ाँ
दुनिया सभी बातिल की तलबगार लगे है
अहमद शाहिद ख़ाँ
दिल की ख़्वाहिश बढ़ते बढ़ते तूफ़ाँ होती जाती है
अहमद शाहिद ख़ाँ
शबनम है कि धोका है कि झरना है कि तुम हो
अहमद सलमान
फ़ड़फ़ड़ाता हुआ परिंदा है
अहमद सज्जाद बाबर
इश्क़ इक मशग़ला-ए-जाँ भी तो हो सकता है
अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी
चराग़ उन पे जले थे बहुत हवा के ख़िलाफ़
अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी
हैं शाख़ शाख़ परेशाँ तमाम घर मेरे
अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी
इक ख़्वाब है ये प्यास भी दरिया भी ख़्वाब है
अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी
और सी धूप घटा और सी रक्खी हुई है
अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी
उड़ती है ख़ाक दिल के दरीचों के आस-पास
अहमद रिज़वान
शब ढले गुम्बद-ए-असरार में आ जाता है
अहमद रिज़वान
मैं ख़ाक हो रहा हूँ यहाँ ख़ाक-दान में
अहमद रिज़वान