Islamic Poetry (page 19)
दुनिया को रू-शनास-ए-हक़ीक़त न कर सके
हबीब अहमद सिद्दीक़ी
एक मैं हूँ और लाख मसाइल ख़ुदा गवाह
गुलज़ार वफ़ा चौदरी
फ़लाह-ए-आदमियत में सऊबत सह के मर जाना
गुलज़ार देहलवी
उसी का ईमाँ बदल गया है
गुलज़ार
तख़्लीक़
गुलज़ार
किताबें
गुलज़ार
वो ख़त के पुर्ज़े उड़ा रहा था
गुलज़ार
ऐसा ख़ामोश तो मंज़र न फ़ना का होता
गुलज़ार
न कोई दीन होता है न कोई ज़ात होती है
गुलशन बरेलवी
शजर-ए-उम्मीद भी जल गया वो वफ़ा की शाख़ भी जल गई
गुलनार आफ़रीन
हमारा नाम पुकारे हमारे घर आए
गुलनार आफ़रीन
यूँ तो दिल हर कदाम रखता है
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
महज़ूँ न हो 'हुज़ूर' अब आता है यार अपना
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
जो यूँ आप बैरून-ए-दर जाएँगे
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
दिल ब-अज़-काबा है याराँ जुब्बा-साई चाहिए
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
आँखों का ख़ुदा ही है ये आँसू की है गर मौज
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
आप ही नाख़ुदा रहा हूँ मैं
ग़ुलाम रसूल तारिक़
ज़िंदगी इश्क़-ओ-मोहब्बत से जवाँ होती है
ग़ुलाम नबी हकीम
जहान-ए-रंग-ओ-बू कितना हसीं है
ग़ुलाम नबी हकीम
हमारा उन का तअ'ल्लुक़ जो रस्म-ओ-राह का था
गुलाम जीलानी असग़र
जफ़ा-ए-दिल-शिकन
ग़ुलाम दस्तगीर मुबीन
वक़ार दे के कभी बे-वक़ार मत करना
गुहर खैराबादी
ज़ाहिदो क़ुदरत-ए-ख़ुदा देखो
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
गया है कूचा-ए-काकुल में अब दिल
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
तुम वफ़ा का एवज़ जफ़ा समझे
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
क़त्ल उश्शाक़ किया करते हैं
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
नीम बिस्मिल की क्या अदा है ये
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
नज़्ज़ारा-ए-रुख़-ए-साक़ी से मुझ को मस्ती है
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
मुँह ढाँप के मैं जो रो रहा हूँ
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
क्यूँकर न ख़ुश हो सर मिरा लटक्का के दार में
गोया फ़क़ीर मोहम्मद