Love Poetry (page 372)

अब टूटने ही वाला है तन्हाई का हिसार

आदिल मंसूरी

आशिक़ थे शहर में जो पुराने शराब के

आदिल मंसूरी

दुम

आदिल लखनवी

नहीं कोई ख़बर करना नहीं है

आदिल हयात

हर इक जवाब की तह में सवाल आएगा

आदिल हयात

दर्द-ए-दिल के तबीब होते हैं

आदिल हयात

बेबसी की धूप है ग़मगीन क्या

आदिल हयात

बात जो तुझ से ज़बानी हो गई

आदिल हयात

आने वाला है कोई मेहमान क्या

आदिल हयात

अर्सा-ए-माह-ओ-साल से गुज़रे

आदिल फ़रीदी

वो कि ख़ुशबू की तरह फैला था मेरे चार-सू

अदीम हाशमी

उसी एक फ़र्द के वास्ते मिरे दिल में दर्द है किस लिए

अदीम हाशमी

तेरे लिए चले थे हम तेरे लिए ठहर गए

अदीम हाशमी

तमाम उम्र की तन्हाई की सज़ा दे कर

अदीम हाशमी

शोर सा एक हर इक सम्त बपा लगता है

अदीम हाशमी

शामिल था ये सितम भी किसी के निसाब में

अदीम हाशमी

सर-ए-सहरा मुसाफ़िर को सितारा याद रहता है

अदीम हाशमी

रख़्त-ए-सफ़र यूँही तो न बेकार ले चलो

अदीम हाशमी

मेरे रस्ते में भी अश्जार उगाया कीजे

अदीम हाशमी

मैं गुफ़्तुगू हूँ कि तहरीर के जहान में हूँ

अदीम हाशमी

लोगों के दर्द अपनी पशेमानियाँ मिलीं

अदीम हाशमी

क्यूँ मिरे लब पे वफ़ाओं का सवाल आ जाए

अदीम हाशमी

कुछ हिज्र के मौसम ने सताया नहीं इतना

अदीम हाशमी

कोई पत्थर कोई गुहर क्यूँ है

अदीम हाशमी

किस हवाले से मुझे किस का पता याद आया

अदीम हाशमी

जब बयाँ करोगे तुम हम बयाँ में निकलेंगे

अदीम हाशमी

हम बहर-ए-हाल दिल ओ जाँ से तुम्हारे होते

अदीम हाशमी

ग़म के हर इक रंग से मुझ को शनासा कर गया

अदीम हाशमी

ग़म है वहीं प ग़म का सहारा गुज़र गया

अदीम हाशमी

फ़ासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा न था

अदीम हाशमी