Love Poetry (page 398)

नाम ख़ुश्बू था सरापा भी ग़ज़ल जैसा था

अब्बास दाना

न हो जिस पे भरोसा उस से हम यारी नहीं रखते

अब्बास दाना

मिरा ख़ुलूस अभी सख़्त इम्तिहान में है

अब्बास दाना

मौत ने मुस्कुरा के पूछा है

अब्बास दाना

गर्दिश-ए-दौराँ से इक लम्हा चुराने लिए

अब्बास दाना

बेवफ़ाई उस ने की मेरी वफ़ा अपनी जगह

अब्बास दाना

अक़्ल-ओ-दानिश को ज़माने से छुपा रक्खा है

अब्बास दाना

अपने ही ख़ून से इस तरह अदावत मत कर

अब्बास दाना

ज़मीन उन के लिए फूल खिलाती है

अब्बास अतहर

चुप-चाप गुज़र जाओ

अब्बास अतहर

अपने अपने सूराख़ों का डर

अब्बास अतहर

ये तुम से किस ने कहा है कि दास्ताँ न कहो

अब्बास अलवी

जो सारे हम-सफ़र इक बार हिर्ज़-ए-जाँ कर लें

अब्बास अलवी

नज़्अ' की सख़्ती बढ़ी उन को पशेमाँ देख कर

अब्बास अली ख़ान बेखुद

किसी से इश्क़ करना और इस को बा-ख़बर करना

अब्बास अली ख़ान बेखुद

बे-वज्ह नहीं उन का बे-ख़ुद को बुलाना है

अब्बास अली ख़ान बेखुद

ज़िंदगी सुंदर ग़ज़ल है दोस्तो

आज़िम कोहली

ये क्या हुआ कि अब तुझी से बद-गुमाँ मैं हो गया

आज़िम कोहली

वो जाते जाते मुझे अपने ग़म भी सौंप गया

आज़िम कोहली

सब्र की तकरार थी जोश ओ जुनून-ए-इश्क़ से

आज़िम कोहली

रंग आ जाता था उन की दीद से रुख़ पर मिरे

आज़िम कोहली

नीला अम्बर चाँद सितारे बच्चों की जागीरें हैं

आज़िम कोहली

मोहब्बत करने वाले दर्द में तन्हा नहीं होते

आज़िम कोहली

देखना कैसे पिघलते जाओगे

आज़िम कोहली

बात चल निकलेगी फिर इक़रार की इंकार की

आज़िम कोहली

वफ़ा और इश्क़ के रिश्ते बड़े ख़ुश-रंग होते हैं

आज़िम कोहली

ज़र्फ़ है किस में कि वो सारा जहाँ ले कर चले

आज़िम कोहली

थी याद किस दयार की जो आ के यूँ रुला गई

आज़िम कोहली

सुबू उठा मिरे साक़ी कि रात जाती है

आज़िम कोहली

सिलसिले सब रुक गए दिल हाथ से जाता रहा

आज़िम कोहली