Love Poetry (page 78)
बे-तअल्लुक़ ज़िंदगी अच्छी नहीं
हफ़ीज़ जालंधरी
अर्ज़-ए-हुनर भी वज्ह-ए-शिकायात हो गई
हफ़ीज़ जालंधरी
ऐ दोस्त मिट गया हूँ फ़ना हो गया हूँ मैं
हफ़ीज़ जालंधरी
अब तो कुछ और भी अंधेरा है
हफ़ीज़ जालंधरी
आशिक़ सा बद-नसीब कोई दूसरा न हो
हफ़ीज़ जालंधरी
आने वाले जाने वाले हर ज़माने के लिए
हफ़ीज़ जालंधरी
आख़िर एक दिन शाद करोगे
हफ़ीज़ जालंधरी
आ ही गया वो मुझ को लहद में उतारने
हफ़ीज़ जालंधरी
ये तमीज़-ए-इश्क़-ओ-हवस नहीं है हक़ीक़तों से गुरेज़ है
हफ़ीज़ होशियारपुरी
ये दिलकशी कहाँ मिरी शाम-ओ-सहर में थी
हफ़ीज़ होशियारपुरी
तमाम उम्र तिरा इंतिज़ार हम ने किया
हफ़ीज़ होशियारपुरी
नज़र से हद्द-ए-नज़र तक तमाम तारीकी
हफ़ीज़ होशियारपुरी
मोहब्बत करने वाले कम न होंगे
हफ़ीज़ होशियारपुरी
कहीं ये तर्क-ए-मोहब्बत की इब्तिदा तो नहीं
हफ़ीज़ होशियारपुरी
जब कभी हम ने किया इश्क़ पशेमान हुए
हफ़ीज़ होशियारपुरी
ग़म-ए-ज़िंदगानी के सब सिलसिले
हफ़ीज़ होशियारपुरी
आज की रात
हफ़ीज़ होशियारपुरी
तमाम उम्र तिरा इंतिज़ार हम ने किया
हफ़ीज़ होशियारपुरी
राज़-ए-सर-बस्ता मोहब्बत के ज़बाँ तक पहुँचे
हफ़ीज़ होशियारपुरी
फिर से आराइश-ए-हस्ती के जो सामाँ होंगे
हफ़ीज़ होशियारपुरी
नर्गिस पे तो इल्ज़ाम लगा बे-बसरी का
हफ़ीज़ होशियारपुरी
न पूछ क्यूँ मिरी आँखों में आ गए आँसू
हफ़ीज़ होशियारपुरी
मोहब्बत करने वाले कम न होंगे
हफ़ीज़ होशियारपुरी
मन-ओ-तू का हिजाब उठने न दे ऐ जान-ए-यकताई
हफ़ीज़ होशियारपुरी
कुछ इस तरह से नज़र से गुज़र गया कोई
हफ़ीज़ होशियारपुरी
कुछ इस तरह से नज़र से गुज़र गया कोई
हफ़ीज़ होशियारपुरी
कहाँ कहाँ न तसव्वुर ने दाम फैलाए
हफ़ीज़ होशियारपुरी
हर क़दम पर हम समझते थे कि मंज़िल आ गई
हफ़ीज़ होशियारपुरी
ग़म-ए-आफ़ाक़ है रुस्वा ग़म-ए-दिल-बर बन के
हफ़ीज़ होशियारपुरी
बे-चारगी-ए-हसरत-ए-दीदार देखना
हफ़ीज़ होशियारपुरी