Love Poetry (page 90)
ज़िंदगी इश्क़-ओ-मोहब्बत से जवाँ होती है
ग़ुलाम नबी हकीम
जहान-ए-रंग-ओ-बू कितना हसीं है
ग़ुलाम नबी हकीम
इश्क़ अहद-ए-बेवफ़ा में बे-नवा हो जाएगा
ग़ुलाम नबी आवान
तू सरहद-ए-ख़याल से आगे गुज़र गया
गुलाम जीलानी असग़र
तू अंग अंग में ख़ुश्बू सी बन गया होगा
गुलाम जीलानी असग़र
मिले भी दोस्त तो इस तर्ज़-ए-बे-दिली से मिले
गुलाम जीलानी असग़र
मौज-ए-सरसर की तरह दिल से गुज़र जाओगे
गुलाम जीलानी असग़र
कुछ तुम्हारी अंजुमन में ऐसे दीवाने भी थे
गुलाम जीलानी असग़र
हमारा उन का तअ'ल्लुक़ जो रस्म-ओ-राह का था
गुलाम जीलानी असग़र
अब के बाज़ार में ये तुर्फ़ा तमाशा देखा
गुलाम जीलानी असग़र
जफ़ा-ए-दिल-शिकन
ग़ुलाम दस्तगीर मुबीन
वरक़ वरक़ जो ज़माने के शाहकार में था
गुहर खैराबादी
तूफ़ान समुंदर के न दरिया के भँवर देख
गुहर खैराबादी
तोड़ कर शीशा-ए-दिल को मिरे बर्बाद न कर
गुहर खैराबादी
तारीकियों में अपनी ज़िया छोड़ जाऊँगा
गुहर खैराबादी
मैं ग़र्क़ वहाँ प्यास के पैकर की तरह था
गुहर खैराबादी
मैं इक मुसाफ़ि-ए-तन्हा मिरा सफ़र तन्हा
गुहर खैराबादी
जिस तरफ़ भी देखिए साया नहीं
गुहर खैराबादी
दिल के दामन में जो सरमाया-ए-अफ़्कार न था
गुहर खैराबादी
दर्द-ए-दिल के साथ क्या मेरे मसीहा कर दिया
गुहर खैराबादी
चराग़ से कभी तारों से रौशनी माँगे
गुहर खैराबादी
बे-ख़बर कैसे हो रहे हो तुम
गुहर खैराबादी
ज़िंदगी की रौशनी के इस्तिआरे ख़्वाब हैं
गुफ़्तार ख़याली
नासेहा आशिक़ी में रख मा'ज़ूर
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
नहीं बचता है बीमार-ए-मोहब्बत
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
ख़ून मिरा कर के लगाना न हिना मेरे ब'अद
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
जामा-ए-सुर्ख़ तिरा देख के गुल
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
दिमाग़ और ही पाती हैं इन हसीनों में
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
ये इक तेरा जल्वा सनम चार सू है
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
उस को मुझ से रुठा दिया किस ने
गोया फ़क़ीर मोहम्मद