Love Poetry (page 89)
शायद अभी कमी सी मसीहाइयों में है
गुलनार आफ़रीन
शजर-ए-उम्मीद भी जल गया वो वफ़ा की शाख़ भी जल गई
गुलनार आफ़रीन
न साथ देगा कोई राह आश्ना मेरा
गुलनार आफ़रीन
न पूछ ऐ मिरे ग़म-ख़्वार क्या तमन्ना थी
गुलनार आफ़रीन
हमारा नाम पुकारे हमारे घर आए
गुलनार आफ़रीन
दिल ने इक आह भरी आँख में आँसू आए
गुलनार आफ़रीन
आँसू भी वही कर्ब के साए भी वही हैं
गुलनार आफ़रीन
आँख में अश्क लिए ख़ाक लिए दामन में
गुलनार आफ़रीन
शब-ए-हिज्र में एक दिन देखना
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
करूँ क़त्-ए-उल्फ़त बुतों से व-लेकिन
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
इश्क़ ने सामने होते ही जलाया दिल को
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
इश्क़ में ख़ूब नीं बहुत रोना
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
इश्क़ में दर्द से है हुर्मत-ए-दिल
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
अदा को तिरी मेरा जी जानता है
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
ये दिल ही जल्वा-गाह है उस ख़ुश-ख़िराम का
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
उस शोख़ से क्या कीजिए इज़्हार-ए-तमन्ना
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
उम्र गई उल्फ़त-ए-ज़र जी से इलाही न गई
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
शजर बाग़-ए-जहाँ का था जहाँ तक सब समर लाया
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
मुझ से मुड़ने की नीं किसी रू से
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
महज़ूँ न हो 'हुज़ूर' अब आता है यार अपना
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
क्या रफ़ू करने लगा है जा भी नादाँ यक तरफ़
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
जो यूँ आप बैरून-ए-दर जाएँगे
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
जहाँ में कहाँ बाहम उल्फ़त रही है
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
जब से गया है वो मिरा ईमान-ए-ज़िंदगी
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
गुल-एज़ार और भी यूँ रखते हैं रंग और नमक
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
बा'द-ए-मकीं मकाँ का गर बाम रहा तो क्या हुआ
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
आँखों का ख़ुदा ही है ये आँसू की है गर मौज
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
आबरू उल्फ़त में अगर चाहिए
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
आप ही नाख़ुदा रहा हूँ मैं
ग़ुलाम रसूल तारिक़
ज़िंदगी इश्क़-ओ-मोहब्बत से जवाँ होती है
ग़ुलाम नबी हकीम