Love Poetry (page 96)
वही वा'दा है वही आरज़ू वही अपनी उम्र-ए-तमाम है
ग़ुलाम मौला क़लक़
उठने में दर्द-ए-मुत्तसिल हूँ मैं
ग़ुलाम मौला क़लक़
उन से कहा कि सिद्क़-ए-मोहब्बत मगर दरोग़
ग़ुलाम मौला क़लक़
तुझे कल ही से नहीं बे-कली न कुछ आज ही से रहा क़लक़
ग़ुलाम मौला क़लक़
थक थक गए हैं आशिक़ दरमांदा-ए-फ़ुग़ाँ हो
ग़ुलाम मौला क़लक़
तेरे दर पर मक़ाम रखते हैं
ग़ुलाम मौला क़लक़
रिश्ता-ए-रस्म-ए-मोहब्बत मत तोड़
ग़ुलाम मौला क़लक़
राज़-ए-दिल दोस्त को सुना बैठे
ग़ुलाम मौला क़लक़
पी भी ऐ माया-ए-शबाब शराब
ग़ुलाम मौला क़लक़
मातम-ए-दीद है दीदार का ख़्वाहाँ होना
ग़ुलाम मौला क़लक़
क्या कहें तुझ से हम वफ़ा क्या है
ग़ुलाम मौला क़लक़
क्या आ के जहाँ में कर गए हम
ग़ुलाम मौला क़लक़
कोई कैसा ही साबित हो तबीअ'त आ ही जाती है
ग़ुलाम मौला क़लक़
किस क़दर दिलरुबा-नुमा है दिल
ग़ुलाम मौला क़लक़
ख़ुशी में भी नवा-संज-ए-फ़ुग़ाँ हूँ
ग़ुलाम मौला क़लक़
ख़ुद देख ख़ुदी को ओ ख़ुद-आरा
ग़ुलाम मौला क़लक़
ख़त ज़मीं पर न ऐ फ़ुसूँ-गर काट
ग़ुलाम मौला क़लक़
जो दिलबर की मोहब्बत दिल से बदले
ग़ुलाम मौला क़लक़
हम तो याँ मरते हैं वाँ उस को ख़बर कुछ भी नहीं
ग़ुलाम मौला क़लक़
हो जुदा ऐ चारा-गर है मुझ को आज़ार-ए-फ़िराक़
ग़ुलाम मौला क़लक़
हर अदावत की इब्तिदा है इश्क़
ग़ुलाम मौला क़लक़
है ख़मोशी-ए-इंतिज़ार बला
ग़ुलाम मौला क़लक़
ग़ैर शायान-ए-रस्म-ओ-राह नहीं
ग़ुलाम मौला क़लक़
दोस्ती उस की दुश्मनी ही सही
ग़ुलाम मौला क़लक़
दिल के हर जुज़्व में जुदाई है
ग़ुलाम मौला क़लक़
दीदा-ए-सर्फ़-ए-इंतिज़ार है शम्अ
ग़ुलाम मौला क़लक़
चल दिए हम ऐ ग़म-ए-आलम विदाअ'
ग़ुलाम मौला क़लक़
बे-गाना-अदाई है सितम जौर-ओ-सितम में
ग़ुलाम मौला क़लक़
ऐ सितम-आज़मा जफ़ा कब तक
ग़ुलाम मौला क़लक़
ऐ ख़ार ख़ार-ए-हसरत क्या क्या फ़िगार हैं हम
ग़ुलाम मौला क़लक़