Sad Poetry (page 109)
इधर भी देख ज़रा बे-क़रार हम भी हैं
फ़ज़ल हुसैन साबिर
है जो ख़ामोश बुत-ए-होश-रुबा मेरे बाद
फ़ज़ल हुसैन साबिर
ये क्या बताएँ कि किस रहगुज़र की गर्द हुए
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
वही रिवायत गज़ीदा-दानिश वही हिकायत किताब वाली
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
उदास देख के वजह-ए-मलाल पूछेगा
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
पाया-ए-ख़िश्त-ओ-ख़ज़फ़ और गुहर से ऊँचा
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
न दामनों में यहाँ ख़ाक-ए-रहगुज़र बाँधो
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
मुद्दतों के बाद फिर कुंज-ए-हिरा रौशन हुआ
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
मैं ख़ुद हूँ नक़्द मगर सौ उधार सर पर है
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
लहू ही कितना है जो चश्म-ए-तर से निकलेगा
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
लहू हमारी जबीं का किसी के चेहरे पर
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
जुरअत-ए-इज़हार से रोकेगी क्या
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
जबीं पे गर्द है चेहरा ख़राश में डूबा
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
इक़रा की सौग़ात की सूरत आ
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
हाथ फैलाओ तो सूरज भी सियाही देगा
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
हर इक क़यास हक़ीक़त से दूर-तर निकला
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
ग़ज़ल के पर्दे में बे-पर्दा ख़्वाहिशें लिखना
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
चंद साँसें हैं मिरा रख़्त-ए-सफ़र ही कितना
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
बिसात-ए-दानिश-ओ-हर्फ़-ओ-हुनर कहाँ खोलें
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
बहुत जुमूद था बे-हौसलों में क्या करता
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
और क्या मुझ से कोई साहिब-नज़र ले जाएगा
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
अच्छा हुआ मैं वक़्त के मेहवर से कट गया
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
आँखों के ख़्वाब दिल की जवानी भी ले गया
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
आह को बाद-ए-सबा दर्द को ख़ुशबू लिखना
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
तुझे ख़बर है कि इब्तिदा भी है इंतिहा भी
फ़य्याज़ तहसीन
अचार का मर्तबान
फ़य्याज़ तहसीन
तमाशा फिर सर-ए-बाज़ार करना
फ़य्याज़ तहसीन
कभी याद-ए-ख़ुदा कभी इश्क़-ए-बुताँ यूँही सारी उम्र गँवा बैठा
फ़य्याज़ तहसीन
अब आ गए हो तो रफ़्तगाँ को भी याद रखना
फ़य्याज़ तहसीन
न तुम आए न चैन आया न मौत आई शब-ए-व'अदा
फ़य्याज़ हाशमी