Sad Poetry (page 110)
आज जाने की ज़िद न करो
फ़य्याज़ हाशमी
न तुम मेरे न दिल मेरा न जान-ए-ना-तवाँ मेरी
फ़य्याज़ हाशमी
मस्तों के जो उसूल हैं उन को निभा के पी
फ़य्याज़ हाशमी
जुगनू हवा में ले के उजाले निकल पड़े
फ़य्याज़ फ़ारुक़ी
निकला जो चिलमनों से वो चेहरा आफ़्ताबी
फ़य्याज़ फ़ारुक़ी
कहानी हो कोई भी तेरा क़िस्सा हो ही जाती है
फ़य्याज़ फ़ारुक़ी
जुगनू हवा में ले के उजाले निकल पड़े
फ़य्याज़ फ़ारुक़ी
याद
फ़े सीन एजाज़
ख़िज़ाँ में चीनी चाय की दावत
फ़े सीन एजाज़
बटन
फ़े सीन एजाज़
अलमिया-ए-नक़्द
फ़े सीन एजाज़
उस की हर बात ने जादू सा किया था पहले
फ़े सीन एजाज़
समुंदर सर पटक कर मर रहा था
फ़े सीन एजाज़
ख़र्च जब हो गई जज़्बों की रक़म आप ही आप
फ़े सीन एजाज़
इश्क़ झेला है तो चेहरा ज़र्द होना चाहिए
फ़े सीन एजाज़
घर की मुश्किल कोई हल चाहती है
फ़े सीन एजाज़
ग़म दुनिया के याद जब आएँ उस की याद भी आने दो
फ़े सीन एजाज़
अच्छी-ख़ासी रुस्वाई का सबब होती है
फ़े सीन एजाज़
आँख और नींद के रिश्ते मुझे वापस कर दे
फ़े सीन एजाज़
उस की गली में ज़र्फ़ से बढ़ कर मिला मुझे
फ़व्वाद अहमद
तुम्हारे लिए मुस्कुराती सहर है
फ़व्वाद अहमद
हवा ने छीन लिया आ के मेरे होंटों से
फ़व्वाद अहमद
मैं बोली तेरे लब पर है हँसी मेरी
फ़ौज़िया रबाब
क्यूँ मसाफ़त में न आए याद अपना घर मुझे
फ़ौक़ लुधियानवी
रौ भटकने लगे जब ख़यालात की
फ़ातिमा वसीया जायसी
नहीं ख़याल तो फिर इंतिज़ार किस का है
फ़ातिमा वसीया जायसी
हाथ में अपने अभी तक एक साग़र ही तो है
फ़ातिमा वसीया जायसी
दिल में मोहब्बतों के सिवा और कुछ नहीं
फ़ातिमा वसीया जायसी
दिल में इस का ख़याल क्यूँ आया
फ़ातिमा वसीया जायसी
ठेस कुछ ऐसी लगी है कि बिखरना है उसे
फ़ातिमा हसन