Sad Poetry (page 111)

कोई नहीं है मेरे जैसा चारों ओर

फ़ातिमा हसन

आख़िरी लफ़्ज़

फ़ातिमा हसन

यादों के सब रंग उड़ा कर तन्हा हूँ

फ़ातिमा हसन

सुकून-ए-दिल के लिए इश्क़ तो बहाना था

फ़ातिमा हसन

रुका जवाब की ख़ातिर न कुछ सवाल किया

फ़ातिमा हसन

रूह की माँग है वो जिस्म का सामान नहीं

फ़ातिमा हसन

मैं टूट कर उसे चाहूँ ये इख़्तियार भी हो

फ़ातिमा हसन

मैं टूट कर उसे चाहूँ ये इख़्तियार भी हो

फ़ातिमा हसन

ख़्वाब गिरवी रख दिए आँखों का सौदा कर दिया

फ़ातिमा हसन

ख़ुशबू है और धीमा सा दुख फैला है

फ़ातिमा हसन

कौन ख़्वाहिश करे कि और जिए

फ़ातिमा हसन

जाता है जो घरों को वो रस्ता बदल दिया

फ़ातिमा हसन

उस की दीवार पे मनक़ूश है वो हर्फ़-ए-वफ़ा

फ़सीह अकमल

मुज़्तरिब दिल की कहानी और है

फ़सीह अकमल

मुद्दत से वो ख़ुशबू-ए-हिना ही नहीं आई

फ़सीह अकमल

लटकाई दीवार पे किस ने हातिम की तस्वीर

फ़सीह अकमल

कुछ नया करने की ख़्वाहिश में पुराने हो गए

फ़सीह अकमल

जो तू नहीं है तो लगता है अब कि तू क्या है

फ़सीह अकमल

जड़ों से सूखता तन्हा शजर है

फ़सीह अकमल

देखिए हालात के जोगी का कब टूटे शराप

फ़सीह अकमल

दे गया लिख कर वो बस इतना जुदा होते हुए

फ़सीह अकमल

चश्म-ए-हैरत को तअल्लुक़ की फ़ज़ा तक ले गया

फ़सीह अकमल

मैं उस की बातों में ग़म अपना भूल जाता मगर

फ़रियाद आज़र

सुराग़ भी न मिले अजनबी सदा के मुझे

फ़रियाद आज़र

सबब थी फ़ितरत-ए-इंसाँ ख़राब मौसम का

फ़रियाद आज़र

इसी फ़ुतूर में कर्ब-ओ-बला से लिपटे हुए

फ़रियाद आज़र

इस तमाशे का सबब वर्ना कहाँ बाक़ी है

फ़रियाद आज़र

तिरे ख़िलाफ़ किया जब भी एहतिजाज ऐ दोस्त

फ़रताश सय्यद

ये दिल-कथा है अदाकार तेरे बस में नहीं

फ़रताश सय्यद

वो भी गुमराह हो गया होगा

फ़रताश सय्यद