Sad Poetry (page 113)

सिलसिले ख़्वाब के अश्कों से सँवरते कब हैं

फ़ारूक़ शमीम

मैं तो लम्हात की साज़िश का निशाना ठहरा

फ़ारूक़ शमीम

ग़ज़लों में अब वो रंग न रानाई रह गई

फ़ारूक़ शमीम

दर्द के चेहरे बदल जाते हैं क्यूँ

फ़ारूक़ शमीम

याद रखते किस तरह क़िस्से कहानी लोग थे

फ़ारूक़ शफ़क़

वो अलग चुप है ख़ुद से शर्मा कर

फ़ारूक़ शफ़क़

रात काफ़ी लम्बी थी दूर तक था तन्हा मैं

फ़ारूक़ शफ़क़

पौ फटी एक ताज़ा कहानी मिली

फ़ारूक़ शफ़क़

कोई भी शख़्स न हंगामा-ए-मकाँ में मिला

फ़ारूक़ शफ़क़

खिड़कियों पर मल्गजे साए से लहराने लगे

फ़ारूक़ शफ़क़

घर की चीज़ों से यूँ आश्ना कौन है

फ़ारूक़ शफ़क़

दुनिया क्या है बर्फ़ की इक अलमारी है

फ़ारूक़ शफ़क़

दिन को थे हम इक तसव्वुर रात को इक ख़्वाब थे

फ़ारूक़ शफ़क़

छाँव की शक्ल धूप की रंगत बदल गई

फ़ारूक़ शफ़क़

बहुत धोका किया ख़ुद को मगर क्या कर लिया मैं ने

फ़ारूक़ शफ़क़

आँधियों का ख़्वाब अधूरा रह गया

फ़ारूक़ शफ़क़

जुनूँ-आसार मौसम का पता कोई नहीं देगा

फ़ारूक़ नाज़की

हिसार-ए-ख़ौफ़-ओ-हिरास में है बुतान-ए-वहम-ओ-गुमाँ की बस्ती

फ़ारूक़ नाज़की

सुनहरी दरवाज़े के बाहर

फ़ारूक़ नाज़की

नींद क्यूँ नहीं आती

फ़ारूक़ नाज़की

मौत

फ़ारूक़ नाज़की

मातम-ए-नीम-ए-शब

फ़ारूक़ नाज़की

एक नज़्म जंगलों के नाम

फ़ारूक़ नाज़की

और मैं चुप रहा

फ़ारूक़ नाज़की

वही में हूँ वही ख़ाली मकाँ है

फ़ारूक़ नाज़की

वही मैं हूँ वही ख़ाली मकाँ है

फ़ारूक़ नाज़की

तेरी मर्ज़ी न दे सबात मुझे

फ़ारूक़ नाज़की

पूरे क़द से मैं खड़ा हूँ सामने आएगा क्या

फ़ारूक़ नाज़की

नई बासी कोई ख़बर दे दे

फ़ारूक़ नाज़की

मेरे चेहरे की स्याही का पता दे कोई

फ़ारूक़ नाज़की