Sad Poetry (page 108)
मैं अक्सर खो सा जाता हूँ गली-कूचों के जंगल में
फ़ाज़िल जमीली
इस कॉकटेल का तो नशा ही कुछ और है
फ़ाज़िल जमीली
ज़िंदगानी को अदम-आबाद ले जाने लगा
फ़ाज़िल जमीली
शौक़ीन मिज़ाजों के रंगीन तबीअ'त के
फ़ाज़िल जमीली
सफ़ेद-पोशी-ए-दिल का भरम भी रखना है
फ़ाज़िल जमीली
मिसाल-ए-शम्अ जला हूँ धुआँ सा बिखरा हूँ
फ़ाज़िल जमीली
मिरे वजूद को परछाइयों ने तोड़ दिया
फ़ाज़िल जमीली
मेरे होंटों पे तेरे नाम की लर्ज़िश तो नहीं
फ़ाज़िल जमीली
ख़्वाब में देख रहा हूँ कि हक़ीक़त में उसे
फ़ाज़िल जमीली
ख़ुमार-ए-शब में तिरा नाम लब पे आया क्यूँ
फ़ाज़िल जमीली
ख़िज़ाँ का रंग दरख़्तों पे आ के बैठ गया
फ़ाज़िल जमीली
हम ने किसी की याद में अक्सर शराब पी
फ़ाज़िल जमीली
गुज़रती है जो दिल पर वो कहानी याद रखता हूँ
फ़ाज़िल जमीली
अब तो अश्कों की रवानी में न रक्खी जाए
फ़ाज़िल जमीली
ज़मज़मा-ए-आह-ओ-फ़ुग़ाँ दूर तक
फ़ाज़िल अंसारी
ये दौर कैसा है या-इलाही कि दोस्त दुश्मन से कम नहीं है
फ़ाज़िल अंसारी
वो बर्क़ का हो कि मौजों के पेच-ओ-ताब का रंग
फ़ाज़िल अंसारी
तोहफ़ा-ए-ग़म भी मिला दर्द की सौग़ात के बा'द
फ़ाज़िल अंसारी
न सनम-कदों की है जुस्तुजू न ख़ुदा के घर की तलाश है
फ़ाज़िल अंसारी
मिरे ज़ख़्म-ए-जिगर को ज़ख़्म-ए-दामन-दार होना था
फ़ाज़िल अंसारी
कोहसारों में नहीं है कि बयाबाँ में नहीं
फ़ाज़िल अंसारी
हुई दिल टूटने पर इस तरह दिल से फ़ुग़ाँ पैदा
फ़ाज़िल अंसारी
गुलज़ार में एक फूल भी ख़ंदाँ तो नहीं है
फ़ाज़िल अंसारी
दिल के मकाँ में आँख के आँगन में कुछ न था
फ़ाज़िल अंसारी
चमक सितारों की नज़रों पे बार गुज़री है
फ़ाज़िल अंसारी
बता ऐ ज़िंदगी तेरे परस्तारों ने क्या पाया
फ़ाज़िल अंसारी
अश्क आया आँख में जलता हुआ
फ़ाज़िल अंसारी
ऐ कहकशाँ गुज़र के तिरी रहगुज़र से हम
फ़ाज़िल अंसारी
तू जफ़ाओं से जो बदनाम किए जाता है
फ़ज़ल हुसैन साबिर
ख़ाक में मुझ को मिरी जान मिला रक्खा है
फ़ज़ल हुसैन साबिर