Sad Poetry (page 120)
रात बहुत शराब पी रात बहुत पढ़ी नमाज़
फ़रहत एहसास
फिर वही मौसम-ए-जुदाई है
फ़रहत एहसास
पैकर-ए-अक़्ल तिरे होश ठिकाने लग जाएँ
फ़रहत एहसास
पहले तो ज़रा सा हट के देखा
फ़रहत एहसास
पहले क़ब्रिस्तान आता है फिर अपनी बस्ती आती है
फ़रहत एहसास
नंग धड़ंग मलंग तरंग में आएगा जो वही काम करेंगे
फ़रहत एहसास
नहीं देखता दिन जिसे चश्म-ए-शब देखती है
फ़रहत एहसास
मोहब्बत का सिला-कार-ए-मोहब्बत से नहीं मिलता
फ़रहत एहसास
मिरी मोहब्बत में सारी दुनिया को इक खिलौना बना दिया है
फ़रहत एहसास
मिरे सुबूत बहे जा रहे हैं पानी में
फ़रहत एहसास
मिरे शे'रों में फ़नकारी नहीं है
फ़रहत एहसास
मेहरबाँ मौत ने मरतों को जिला रक्खा है
फ़रहत एहसास
मौत ही एक दवा है और वो जारी है
फ़रहत एहसास
मैं तमाम गर्द-ओ-ग़ुबार हूँ मुझे मेरी सूरत-ए-हाल दे
फ़रहत एहसास
मैं शहरी हूँ मगर मेरी बयाबानी नहीं जाती
फ़रहत एहसास
मैं रोना चाहता हूँ ख़ूब रोना चाहता हूँ मैं
फ़रहत एहसास
मैं महफ़िल-बाज़ घबरा कर हुआ तन्हाई वाला
फ़रहत एहसास
मैं अपने रू-ए-हक़ीक़त को खो नहीं सकता
फ़रहत एहसास
लोग यूँ जाते नज़र आते हैं मक़्तल की तरफ़
फ़रहत एहसास
लगे हुए हैं ज़माने के इंतिज़ाम में हम
फ़रहत एहसास
कुर्सी-ए-दिल पे तिरे जाते ही दर्द आ बैठे
फ़रहत एहसास
कुछ भी न कहना कुछ भी न सुनना लफ़्ज़ में लफ़्ज़ उतरने देना
फ़रहत एहसास
कुछ बताता नहीं क्या सानेहा कर बैठा है
फ़रहत एहसास
ख़ुदा ख़ामोश बंदे बोलते हैं
फ़रहत एहसास
ख़ुद से इंकार को हम-ज़ाद किया है मैं ने
फ़रहत एहसास
ख़ूब होनी है अब इस शहर में रुस्वाई मिरी
फ़रहत एहसास
ख़त बहुत उस के पढ़े हैं कभी देखा नहीं है
फ़रहत एहसास
ख़ाना-साज़ उजाला मार
फ़रहत एहसास
ख़ाक ओ ख़ूँ की नई तंज़ीम में शामिल हो जाओ
फ़रहत एहसास
ख़ाक है मेरा बदन ख़ाक ही उस का होगा
फ़रहत एहसास